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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
सेनापति के लक्षण।
Word-Meaning: - (ये) जो (यातुधानाः) पीडा देनेहारे, (अत्त्त्रिणः) पेट भरनेवाले (किमीदिनः) यह क्या यह क्या, ऐसा करनेवाले लुतरे [हैं] [वे] (विलपन्तु) विलाप करें। (अथ) और (अग्ने) हे अग्नि (च) और (इन्द्रः) हे वायु, तुम दोनों (इदम्) इस (हविः) होम सामग्री को (प्रति हर्यतम्) अङ्गीकार करो ॥३॥
Connotation: - जैसे अग्नि, वायु के साथ हवनसामग्री से प्रचण्ड होकर दुर्गन्धादि दोषों का नाश करती है, वैसे ही अग्नि के समान तेजस्वी और वायु के समान वेगवान् महाप्रतापी राजा से दुःखदायी, स्वार्थी, बतबने लोग अपने किये का दण्ड पाकर विलाप करते हैं, तब उसके राज्य में शान्ति होती है ॥३॥
Footnote: ३−विलपन्तु। लप कथने-लोट्। विकृतं लपनं परिवेदनं कुर्वन्तु। यातु-धानाः। मं०−१। पीडाप्रदाः, राक्षसाः। अत्त्त्रिणः। अदेस्त्रिनिश्च। उ० ४।६८। इति अद भक्षणे-त्रिनि। अदनशीलाः, उदरपोषकाः। किमीदिनः। मं० १। विरुद्धबुद्धयः, पिशुनाः। अथ। अनन्तरम् अपि च। इदम्। प्रस्तुतमुपस्थितम्। अग्ने। मं० १। अग्निवत् तेजस्विन् राजन्। हविः। १।४।३। दानम्। हव्यं द्रव्यम्। आह्वानम्। इन्द्रः। १।२।३। परमैश्वर्यवान्। वायुः। वायुवद् वेगवान् राजा। प्रति+हर्यतम्। हर्य गतिकान्त्योः-लोट्। युवां कामयेथां, स्वीकुरुतम् ॥
