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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
रोगनाश के लिये उपदेश।
Word-Meaning: - (याः) जो (देवत्याः) दिव्य गुण युक्त (रोहिणीः) स्वास्थ्य उत्पन्न करनेवाली ओषधें (उत) और (याः) जो (रोहिणीः) लाल वर्णवाली (गावः) दिशाएँ हैं। (ताभिः) उन सबके साथ (त्वा) तुझको (रूपम् रूपम्) सब प्रकार की सुन्दरता और (वयः वयः) सब प्रकार के बल के लिये (परि दध्मसि) हम सर्वथा पुष्ट करते हैं ॥३॥
Connotation: - जब सूर्य की किरणों से दिशाएँ रक्तवर्ण दिखायी देती हैं, तब प्रातः-सायं दोनों समय सद्वैद्य रोगी को सुपरीक्षित औषधों और यथायोग्य वायुसेवन से स्वस्थ करके सब प्रकार से हृष्ट-पुष्ट और बलवान् करें ॥३॥
Footnote: ३−रोहिणीः। रुहेश्च। उ० २।५५। इति रुह उद्भवे−इनन्। षिद्गौरादिभ्यश्च। पा० ४।१।४१। इति गौरादित्वात् ङीष्। वा छन्दसि। पा० ६।१।१०६। इति जसि पूर्वसवर्णदीर्घः। रोहयन्ति जनयन्ति स्वास्थ्यं ता रोहिण्यः, ओषधयः। देवत्याः। भवे छन्दसि। पा० ४।४।११०। इति देवता-यत्। दिव्यगुणयुक्ताः। गावः। स्त्रीलिङ्गम्। दिशाः। रोहिणीः। वर्णादनुदात्तात् तोपधात्तो नः। पा० ४।१।३९। इति रोहित−ङीप्, तकारस्य नकारः। जसि पूर्वसवर्णदीर्घः। रोहिण्यः, लोहितवर्णाः प्रातःसायंकालभवाः। रूपं−रूपम्। नित्यवीप्सयोः। पा० ८।१।४। इति द्विर्वचनम्। सर्वसौन्दर्येण। सर्वसौन्दर्याय। वयः−वयः। वय गतौ−असुन्। वीप्सायां द्विर्वचनम्। कृत्स्नेन यौवनेन, सर्वेण सामर्थ्येण। सर्वसामर्थ्याय। ताभिः। गोभिश्च रोहिणीभिश्च ॥
