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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
नाडीछेदन [फ़सद् खोलने] के दृष्टान्त से दुर्वासनाओं के नाश का उपदेश।
Word-Meaning: - (शतस्य धमनीनाम्) सौ प्रधान नाड़ियों में से और (सहस्रस्य हिराणाम्) सहस्र शाखा नाड़ियों में से (इमाः) ये सब (मध्यमाः) बीचवाली (इत्) भी (अस्थुः) ठहर गयीं, (अन्ताः) अन्त की [अवशिष्ट नाड़ियाँ] (साकम्) एक साथ (अरंसत) क्रीड़ा करने लगी हैं ॥३॥
Connotation: - सिराछेदन से असंख्य धमनी और सिरा नाड़ियों का रुधिर यथाविधि चिकित्सक निकाल कर बन्ध कर देवे, जिससे कि नाड़ियाँ पहिले के समान चेष्टा करने लगें ॥ २−मनुष्य अपनी अनन्त चित्तवृत्तियों को कुमार्ग से रोक कर सुमार्ग में चलावें ॥३॥
Footnote: ३−शतस्य।– शतसंख्यानाम् अपरिमितानाम्। धमनीनाम्। म० २। हृदयगतानां प्रधाननाडीनाम्। सहस्रस्य। अपरिमितानाम्। हिराणाम्। म० १। सिराणाम्। सूक्ष्मशाखानाडीनाम्। अस्थुः। १।१६।१। स्थिता अभूवन् मध्यमाः। म० २। मध्यभवाः। साकम्। युगपत्। अन्ताः। अम गतौ−तन्। अन्तिमाः, अवशिष्टाः सर्वा नाड्यः। अरंसत। रमु क्रीडायाम्−लुङ्। यथापूर्वं रमन्ते स्म, चेष्टां कृतवत्यः ॥
