Word-Meaning: - (एनम्) इस पुरुष को (शीर्षक्त्याः) शिर की पीड़ा से (उत) और [उस खाँसी से] (मुञ्च) छुड़ा (यः कासः) जिस खाँसी ने (अस्य) इस पुरुष के (परुःपरुः) जोड़-जोड़ में (आविवेश) घर कर लिया है। (यः) जो खाँसी (अभ्रजाः) मेघ से उत्पन्न, (वातजाः) वायु से उत्पन्न (च) और (यः) जो (शुष्मः) सूखी [होवे और जो] (वनस्पतीन्) वृक्षों से (च) और (पर्वतान्) पहाड़ों से (सचताम्) संबन्धवाली होवे ॥३॥
Connotation: - खाँसी सब रोगों की माता है, जैसा कि प्रसिद्ध हैलड़ाई का घर हाँसी और रोग का घर खाँसी। जैसे सद्वैद्य मन्त्र में कहे अनुसार मस्तक की पीड़ा और खाँसी आदि बाहिरी और भीतरी रोगों का निदान जान कर रोगी को स्वस्थ करता है, इसी प्रकार परमेश्वर वेदज्ञान से मनुष्य को दोषों से छुड़ा कर और ब्रह्मज्ञान देकर अत्यन्त सुखी करता है। इसी प्रकार राजप्रबन्ध और गृहप्रबन्ध आदि व्यवहार में विचारना चाहिये ॥३॥