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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
वरुण का क्रोध प्रचण्ड है।
Word-Meaning: - [हे आत्मा !] (महतः) विशाल (अर्णवात्) समुद्र के समान गंभीर (वैश्वानरात्) सब नरों के हितकारक वा सबके नायक परमेश्वर से (त्वा) तुझको (परि मुञ्चामि) मैं छुड़ाता हूँ। (उग्र) हे प्रचण्डस्वभाव [परमेश्वर !] (सजातान्) [मेरे] तुल्य जन्मवालों को (इह) इस विषय में (आवद) उपदेश कर (च) और (नः) हमारे (ब्रह्म) वैदिक ज्ञान को (अप) आनन्द से (चिकीहि) तू जान ॥४॥
Connotation: - मनुष्य पापकर्म छोड़ने से सर्वहितकारी परमेश्वर के कोप से मुक्त होते हैं। परमात्मा सब प्राणियों को उपदेश करता और सबकी सत्य भक्ति को स्वीकार कर यथार्थ आनन्द देता है ॥४॥
Footnote: ४−परि+मुञ्चामि। म० ३। सर्वथा मोचयामि। वैश्वानरात्। नॄ प्रापणे-अच्। नृणातीति नरः पुरुषः। विश्वश्चासौ नरश्चेति। नरे संज्ञायाम्। प० ६।३।१२९। इति विश्वस्य दीर्घः। विश्वानर एव वैश्वानरः। स्वार्थे अण्। यद्वा। तस्येदम्। पा० ४।३।१२०। यद्वा। तस्मै हितम्। पा० ५।१।५। इति अण्। वैश्वानरः कस्माद् विश्वान् नरान् नयति विश्व एनं नरा नयन्तीति वापि वा विश्वानर एव स्यात् प्रत्यृतः सर्वाणि भूतानि तस्य वैश्वानरः−निरु० ७।२१। सर्वनायकात्। सर्वोपास्यात्। सर्वनरहितात् परमेश्वरात्। अर्णवात्। केशाद् वोऽन्यतरस्याम्। पा० ५।२।१०९। अत्र। अर्णसो लोपश्च। इति वार्त्तिकम्। अर्णस्+व, सलोपः। अर्णांसि जलानि सन्त्यस्मिन्। समुद्रात् समुद्रवद् गम्भीरस्वभावात्। महतः। वर्तमाने पृषद्बृहन्महज्जगच्छतृवच्च। उ० २।८४। इति मह पूजायाम्-अति। विशालात्। सजातान्। समानजन्मनः पुरुषान्। उग्र। म० १। हे प्रचण्ड, महाक्रोधिन् वरुण ! आ+वद। समन्तात् कथय, उपदिश। ब्रह्म। १।८।४। वेदविज्ञानम्। अप। आनन्दे−इति शब्दस्तोममहानिधौ। चिकीहि। म० २। कि ज्ञाने-लोट्। जानीहि ॥
