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इ॒र॒ज्यन्न॑ग्ने प्रथयस्व ज॒न्तुभि॑र॒स्मे रायो॑ऽअमर्त्य। स द॑र्श॒तस्य॒ वपु॑षो॒ वि रा॑जसि पृ॒णक्षि॑ सान॒सिं क्रतु॑म् ॥१०९ ॥

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

इ॒र॒ज्यन्। अ॒ग्ने॒। प्र॒थ॒य॒स्व॒। ज॒न्तुभि॒रिति॑ ज॒न्तुऽभिः॑। अ॒स्मेऽइत्य॒स्मे। रायः॑। अ॒म॒र्त्य॒। सः। द॒र्श॒तस्य॑। वपु॑षः। वि। रा॒ज॒सि॒। पृ॒णक्षि॑। सा॒न॒सिम्। क्रतु॑म् ॥१०९ ॥

यजुर्वेद » अध्याय:12» मन्त्र:109


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हिन्दी - स्वामी दयानन्द सरस्वती

मनुष्य कैसा हो, यह विषय अगले मन्त्र में कहा है ॥

पदार्थान्वयभाषाः - हे (अमर्त्य) नाश और संसारी मनुष्यों के स्वभाव से रहित (अग्ने) अग्नि के समान पुरुषार्थी ! जो (इरज्यन्) ऐश्वर्य्य का सञ्चय करते हुए आप (दर्शतस्य) देखने योग्य (वपुषः) रूप का (सानसिम्) सनातन (क्रतुम्) बुद्धि का (पृणक्षि) सम्बन्ध करते हो और उसी बुद्धि में विशेष करके (विराजसि) शोभित होते हो, (सः) सो आप (अस्मे) हम लोगों के लिये (जन्तुभिः) मनुष्यादि प्राणियों से (रायः) धनों का (प्रथयस्व) विस्तार कीजिये ॥१०९ ॥
भावार्थभाषाः - जो पुरुष मनुष्यों के लिये सनातन वेदविद्या को देता और सुन्दर आचार में विराजमान होता है, वही ऐश्वर्य्य को प्राप्त हो के दूसरों के लिये प्राप्त करा सकता है ॥१०९ ॥
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संस्कृत - स्वामी दयानन्द सरस्वती

मनुष्यः कीदृशो भवेदित्याह ॥

अन्वय:

(इरज्यन्) ऐश्वर्य्यं कुर्वन्, इरज्यतीति ऐश्वर्य्यकर्मसु पठितम् ॥ (निघं०२.२१) (अग्ने) अग्निवत् प्राप्तपुरुषार्थ (प्रथयस्व) विस्तारय (जन्तुभिः) मनुष्यादिभिः (अस्मे) अस्मभ्यम् (रायः) श्रियः (अमर्त्य) नाशप्राकृतमनुष्यस्वभावरहित (सः) (दर्शतस्य) द्रष्टुं योग्यस्य (वपुषः) रूपस्य, वपुरिति रूपनामसु पठितम् ॥ (निघं०३.७) (वि) (राजसि) (पृणक्षि) सम्बध्नासि (सानसिम्) सनातनीम् (क्रतुम्) प्रज्ञाम्। [अयं मन्त्रः शत०७.३.१.३२ व्याख्यातः] ॥१०९ ॥

पदार्थान्वयभाषाः - हे अमर्त्याग्ने ! य इरज्यंस्त्वं दर्शतस्य वपुषः सानसिं क्रतुं पृणक्षि, तत्रैव विराजसि, सोऽस्मे जन्तुभी रायः प्रथयस्व ॥१०९ ॥
भावार्थभाषाः - यो मनुष्येभ्यः सनातनीं वेदविद्यां ददाति, सुरूपाचारे विराजते, स एवैश्वर्य्यं लब्ध्वाऽन्येभ्यः प्रापयितुं शक्नोति ॥१०९ ॥
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मराठी - माता सविता जोशी

(यह अनुवाद स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के आधार पर किया गया है।)
भावार्थभाषाः - जो पुरुष मानवांसाठी सनातन वेदविद्या देतो व उत्तम आचरणयुक्त असतो तोच ऐश्वर्य प्राप्त करून दुसऱ्यांनाही ऐश्वर्य प्राप्त करून देऊ शकतो.