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स पु॑ना॒नो म॒दिन्त॑म॒: सोम॑श्च॒मूषु॑ सीदति । प॒शौ न रेत॑ आ॒दध॒त्पति॑र्वचस्यते धि॒यः ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

sa punāno madintamaḥ somaś camūṣu sīdati | paśau na reta ādadhat patir vacasyate dhiyaḥ ||

पद पाठ

सः । पु॒ना॒नः । म॒दिन्ऽत॑मः । सोमः॑ । च॒मूषु॑ । सी॒द॒ति॒ । प॒शौ । न । रेतः॑ । आ॒ऽदधत् । पतिः॑ । व॒च॒स्य॒ते॒ । धि॒यः ॥ ९.९९.६

ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:99» मन्त्र:6 | अष्टक:7» अध्याय:4» वर्ग:26» मन्त्र:1 | मण्डल:9» अनुवाक:6» मन्त्र:6


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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (सः) पूर्वोक्त परमात्मा (पुनानः) सबको पवित्र करनेवाला है (मदिन्तमः) आनन्दस्वरूप है, (सोमः) सर्वोत्पादक है, (चमूषु) सब प्रकार के सैनिक बलों में (सीदति) स्थिर है, (पशौ, न) द्रव्य के समान (रेतः) “रेत इति जलनामसु पठितम्” नि. प्रकृति की सूक्ष्मावस्था को (आदधत्) धारण करता है, (धियः, पतिः) वह कर्माध्यक्ष (वचस्यते) उपासना किया जाता है ॥६॥
भावार्थभाषाः - आनन्दप्रद, विजयादिप्रदाता और प्रलयादिकर्त्ता केवल परमात्मा ही है, इससे वही उपास्य है ॥६॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

उल्लास शक्ति व बुद्धि

पदार्थान्वयभाषाः - (सः) = वह (सोमः) = सोम (पुनानः) = पवित्र करता हुआ (मदिन्तमः) = अतिशयेन आनन्द को देनेवाला होता हुआ (चमूषु सीदति) = शरीर रूप पात्रों में स्थित होता है। शरीर में स्थित होता हुआ यह पवित्रता व उल्लास का जनक होता है। (पशौ न) = जैसे पशुओं में उसी प्रकार रेतः (आदधत्) = शक्ति का आधान करता हुआ यह सोम (धियः पतिः) = बुद्धि का रक्षक (वचस्यते) = कहा जाता है। यह सोम रक्षित हुआ हुआ पशुओं के समान हमें सबल बनाता है, तो साथ ही हमारी बुद्धियों का रक्षक होता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- शरीर में सुरक्षित हुआ हुआ सोम 'उल्लास शक्ति व बुद्धि' का जनक है।
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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (सः) स परमात्मा (पुनानः) सर्वस्य पावयितास्ति (मदिन्तमः) आनन्दस्वरूपश्च (सोमः) सर्वोत्पादकः (चमूषु) अखिलबलेषु सैनिकेषु (सीदति) तिष्ठति (पशौ, न) द्रव्यवत् (रेतः) प्रकृतेः सूक्ष्मावस्थां (आदधत्) दधाति (धियः, पतिः) स कर्माध्यक्षः (वचस्यते) उपास्यते जनैः ॥६॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - That Soma, pure and purifying, most ecstatic and exhilarating, abides in all forms of yajnic existence and, holding the cosmic seed and impregnating Nature as a living organism, is worshipped as the father and sustainer of all thoughts of living beings.