वांछित मन्त्र चुनें

अ॒भि नो॑ वाज॒सात॑मं र॒यिम॑र्ष पुरु॒स्पृह॑म् । इन्दो॑ स॒हस्र॑भर्णसं तुविद्यु॒म्नं वि॑भ्वा॒सह॑म् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

abhi no vājasātamaṁ rayim arṣa puruspṛham | indo sahasrabharṇasaṁ tuvidyumnaṁ vibhvāsaham ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

अ॒भि । नः॒ । वा॒ज॒ऽसात॑मम् । र॒यिम् । अ॒र्ष॒ । पु॒रु॒ऽस्पृह॑म् । इन्दो॒ इति॑ । स॒हस्र॑ऽभर्णसम् । तु॒वि॒ऽद्यु॒म्नम् । वि॒भ्व॒ऽसह॑म् ॥ ९.९८.१

ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:98» मन्त्र:1 | अष्टक:7» अध्याय:4» वर्ग:23» मन्त्र:1 | मण्डल:9» अनुवाक:6» मन्त्र:1


382 बार पढ़ा गया

आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (इन्दो) हे प्रकाशस्वरूप परमात्मन् ! (सहस्रभर्णसम्) अनेक प्रकार पालन-पोषण करनेवाला (पुरुस्पृहम्) जो सबको अभिलषित है, (वाजसातमम्) जो अनन्त प्रकार के बलों का देनेवाला है, (रयिम्) ऐसे धन को (नः) हमारे लिये (अभ्यर्ष) आप दें, (तुविद्युम्नम्) जो अनन्त प्रकार के यशों का देनेवाला और (विभ्वसहम्) सब तरह की प्रतिकूल शक्तियों को दबा देनेवाला है, इस प्रकार का धन आप दें ॥१॥
भावार्थभाषाः - इस मन्त्र में अक्षय धन की प्राप्ति का वर्णन है ॥१॥
382 बार पढ़ा गया

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

उत्तम धन

पदार्थान्वयभाषाः - हे (इन्दो) = सोम ! (नः) = हमारे लिये (रयिम्) = धन [ऐश्वर्य] को अभ्यर्ण प्राप्त करा, जो कि (वाजसातमम्) = अधिक से अधिक बल को देनेवाला हो, पुरुस्पृहम् - बहुत ही स्पृहणीय हो अथवा पालक व पूरक होते हुए स्पृहणीय हो [ पृपालनपूरणयोः] । उस धन को प्राप्त करा जो (सहस्रभर्णसम्) = हजारों का भरण करनेवाला हो। (तुविद्युम्नम्) = महान् ज्ञान ज्योतिवाला हो, (विभ्वासहम्) = महान् शक्तिशाली भी शत्रुओं का अभिभव करनेवाला हो ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सोमरक्षण करनेवाला पुरुष धनार्जन करता है। यह धन उसकी बल वृद्धि व ज्ञान वृद्धि का साधन बनता है। यह धन बहुतों से स्पृहणीय, सभी का भरण करनेवाला होता है । यह धन उसे काम आदि शत्रुओं का शिकार नहीं बना देता ।
382 बार पढ़ा गया

आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (इन्दो) हे प्रकाशस्वरूप ! (सहस्रभर्णसं) अनेकप्रकारैः पोषकं (पुरुस्पृहं) सर्वप्रार्थितं (वाजसातमं) अनेकविधबलप्रदं (रयिं) धनं (नः) अस्मभ्यं (अभि अर्ष) प्रददातु (तुविद्युम्नं) बहुविधयशः प्रदञ्च यत्स्यात् यच्च (विभ्वसहं) सर्वविरुद्धशक्तिरोधकं च स्यात् ॥१॥
382 बार पढ़ा गया

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Indu, divine spirit of peace, power, beauty and grace, move and bless us to achieve wealth, honour and excellence of high order, universally loved and valued, a thousandfold sustaining, mighty powerful, all challenging and finally victorious.