यत्ते॑ प॒वित्र॑म॒र्चिष्यग्ने॒ वित॑तम॒न्तरा । ब्रह्म॒ तेन॑ पुनीहि नः ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
yat te pavitram arciṣy agne vitatam antar ā | brahma tena punīhi naḥ ||
पद पाठ
यत् । ते॒ । प॒वित्र॑म् । अ॒र्चिषि॑ । अग्ने॑ । विऽत॑तम् । अ॒न्तः । आ । ब्रह्म॑ । तेन॑ । पु॒नी॒हि॒ । नः॒ ॥ ९.६७.२३
ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:67» मन्त्र:23
| अष्टक:7» अध्याय:2» वर्ग:17» मन्त्र:3
| मण्डल:9» अनुवाक:3» मन्त्र:23
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (अग्ने) हे ज्ञानस्वरूप परमात्मन् ! (यत्) जो (ते अन्तः) तुममें (पवित्रम्) पवित्र (आविततं) विस्तृत (अर्चिषि) ज्योतियें हैं, (तेन) उनसे (ब्रह्म) हे परमात्मन् ! (नः) हम लोगों को (पुनीहि) पवित्र करिये ॥२३॥
भावार्थभाषाः - ब्रह्म शब्द के अर्थ यहाँ परमात्मा के हैं। सायणाचार्य ने इसके अर्थ शरीर के किये हैं, जो कि वेदाशय से सर्वथा विरुद्ध है ॥२३॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
अग्नि द्वारा पवित्रीकरण
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (अग्ने) = हमें आगे ले चलनेवाले प्रभो ! (यत्) = जो (ते) = तेरा (अर्चिषि अन्तरा) = ज्ञान- ज्वालाओं में विततम् फैला हुआ प्रकाश है वह (पवित्रम्) = हमें पवित्र करनेवाला है । [२] यह पवित्र करनेवाला प्रकाश ही ब्रह्म वृद्धि का साधनभूत वेदज्ञान है [बृहि वृद्धो, 'ब्रह्मवेदः '] । तेन उस ज्ञान के द्वारा (नः पुनीहि) = हमें पवित्र कर ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु अपने ज्ञान के प्रकाश से हमारे जीवन को पवित्र करें।
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (अग्ने) ज्ञानस्वरूप जगन्नियन्तः ! (यत्) यानि (ते अन्तः) त्वयि (पवित्रम्) शुद्धानि (आविततम्) विस्तृतानि (अर्चिषि) ज्योतींषि (तेन) तैः (ब्रह्म) हे परमेश्वर ! (नः) अस्मान् (पुनीहि) पवित्रय ॥२३॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Agni, lord of light, omniscient Spirit of the universe, whatever power and purity there is pervasive in the rays and radiation of light, with that same light, O lord infinite, illuminate and sanctify us and energise our song of adoration.
