अ॒वि॒ता नो॑ अ॒जाश्व॑: पू॒षा याम॑नियामनि । आ भ॑क्षत्क॒न्या॑सु नः ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
avitā no ajāśvaḥ pūṣā yāmani-yāmani | ā bhakṣat kanyāsu naḥ ||
पद पाठ
अ॒वि॒ता । नः॒ । अ॒जऽअ॑श्वः । पू॒षा । याम॑निऽयामनि । आ । भ॒क्ष॒त् । क॒न्या॑सु । नः॒ ॥ ९.६७.१०
ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:67» मन्त्र:10
| अष्टक:7» अध्याय:2» वर्ग:14» मन्त्र:5
| मण्डल:9» अनुवाक:3» मन्त्र:10
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (अजाश्वः) नित्य अध्ययनवाला (पूषा) सर्वपोषक परमात्मा (नः) हम लोगों का (अविता) पालन करनेवाला हो। (यामनि-यामनि) सर्वदा (कन्यासु) कमनीय पदार्थों में (नः) हम लोगों को (आ भक्षत्) ग्रहण करे ॥१०॥
भावार्थभाषाः - परमात्मा ईश्वरपरायण लोगों के लिए सदैव कल्याणकारी होता है ॥१०॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
सविता-पूषा
पदार्थान्वयभाषाः - [१] यह (अजाश्वः) = इन्द्रिय रूप अश्वों को गतिशील व उत्क्षिप्त [नष्ट] मतवाला [अज गतिक्षेपणयो] बनाता हुआ सोम (नः) = हमारा (अविता) = रक्षक हो । इन्द्रियों को पवित्र बनाकर यह हमारा रक्षण करे। यह (यामनि यामनि) = जीवन की प्रत्येक मंजिल में (पूषा) = हमारा पोषण करता है । ब्रह्मचर्य गृहस्थ वानप्रस्थ व संन्यास रूप सभी प्रमाणों में यह हमारा पोषक होता है। [२] यह सोम (नः) = हमें (कन्यासु) = [कन् दीप्तौ ] सब दीप्तियों में 'शरीर को तेजस्विता, मन की निर्मलता व बुद्धि की दीप्ति में (आभक्षत्) = भागी बनाये [आभजताम् सा० ] ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सोम [क] इन्द्रियाश्वों को गतिशील निर्मल बनाकर हमारा रक्षण करता है, [ख] सब जीवन के प्रमाणों में पोषक होता है, [ग] सब दीप्तियों में भागी बनाता है।
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (अजाश्वः) नित्यधनवान् (पूषा) सर्वपालकः परमात्मा (नः) अस्माकं (अविता) पालको भवतु। (यामनि-यामनि) सर्वस्मिन् काले (कन्यासु) कमनीयपदार्थेषु (नः) अस्मान् (आ भक्षत्) गृह्णातु ॥१०॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - May the divine protector and promoter, lord of health and nourishment, Pusha of eternal presence and progress join and bless us at every step on every path of life in the pursuit of all our cherished goals, aims and objects of living.
