म॒हाँ अ॑सि सोम॒ ज्येष्ठ॑ उ॒ग्राणा॑मिन्द॒ ओजि॑ष्ठः । युध्वा॒ सञ्छश्व॑ज्जिगेथ ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
mahām̐ asi soma jyeṣṭha ugrāṇām inda ojiṣṭhaḥ | yudhvā sañ chaśvaj jigetha ||
पद पाठ
म॒हान् । अ॒सि॒ । सो॒म॒ । ज्येष्ठः॑ । उ॒ग्राणा॑म् । इ॒न्दो॒ इति॑ । ओजि॑ष्ठः । युध्वा॑ । सन् । शश्व॑त् । जि॒गे॒थ॒ ॥ ९.६६.१६
ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:66» मन्त्र:16
| अष्टक:7» अध्याय:2» वर्ग:10» मन्त्र:1
| मण्डल:9» अनुवाक:3» मन्त्र:16
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (सोम) हे परमात्मन् ! आप (महानसि) बड़े हैं और (उग्राणाम्) तेजस्वियों में (ज्येष्ठः) बड़े हैं। (इन्दो) हे सर्वप्रकाशक परमात्मन् ! आप (ओजिष्ठः) सर्वोपरि ओजस्वी हैं और आप (युध्वा सन्) अपने से प्रतिकूल शक्तियों से युद्ध करते हुए (शश्वत्) निरन्तर (जिगेथ) जीतते हैं ॥१६॥
भावार्थभाषाः - परमात्मा सूर्य-चन्द्रमादिकों की रचना करता हुआ अर्थात् उत्पत्तिसमय में विनाशरूपी सब विरोधी शक्तियों को जीतता है। इस प्रकार परमात्मा सर्वविजयी कथन किया गया है, किसी युद्धविशेष के अभिप्राय से नहीं ॥१६॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
सदा विजयी
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (सोम) = वीर्यशक्ते ! तू महान् (असि) = आदरणीय है। (ज्येष्ठः) = प्रशस्यतम है । हे (इन्दो) = हमें शक्तिशाली बनानेवाले सोम ! तू (उग्राणाम्) = शत्रुओं के लिये उग्र [ भयंकर] वस्तुओं में (ओजिष्ठ:) = ओजस्वितम है । [२] (युध्वा सन्) = शरीर में रोगों व वासनाओं से युद्ध करनेवाला होता हुआ तू (अश्वत्) = सदा (जिगेथ) = विजयी होता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सोम अत्यन्त महत्त्वपूर्ण प्रशस्यतम वस्तु है। यह हमें युद्ध में सदा विजयी बनाता है ।
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (सोम) जगदुत्पादकपरमेश्वर ! त्वं (महानसि) श्रेष्ठोऽसि। तथा (उग्राणाम्) तेजस्विनां मध्ये (ज्येष्ठः) प्रशस्योऽसि (इन्दो) सर्वप्रकाशकपरमात्मन् ! त्वं (ओजिष्ठः) सर्वोपरि बलवानसि ! अथ च (युध्वा सन्) स्वतः प्रतिकूलशक्तिभिर्युध्यन् (शश्वत्) निरन्तरं (जिगेथ) जयसि ॥१६॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - O Soma, you are great, first, greatest and most lustrous of the mighty, and being a fighter, you are always the winner.
