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वृषा॒ ह्यसि॑ भा॒नुना॑ द्यु॒मन्तं॑ त्वा हवामहे । पव॑मान स्वा॒ध्य॑: ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

vṛṣā hy asi bhānunā dyumantaṁ tvā havāmahe | pavamāna svādhyaḥ ||

पद पाठ

वृषा॑ । हि । असि॑ । भा॒नुना॑ । द्यु॒ऽमन्त॑म् । त्वा॒ । ह॒वा॒म॒हे॒ । पव॑मान । सु॒ऽआ॒ध्यः॑ ॥ ९.६५.४

ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:65» मन्त्र:4 | अष्टक:7» अध्याय:2» वर्ग:1» मन्त्र:4 | मण्डल:9» अनुवाक:3» मन्त्र:4


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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (पवमान) सबको पवित्र करनेवाले हे जगदीश ! आप (भानुना) अच्छे अर्थ को प्रकाश करने से (वृषाहि) अवश्य वेदरूप वाणी की वर्षा करनेवाले (असि) हैं। (स्वाध्यः) अच्छी बुद्धिवाले हम लोग (द्युमन्तं) स्वयंप्रकाश (त्वा) आपकी (हवामहे) स्तुति करते हैं ॥४॥
भावार्थभाषाः - जो पुरुष परमात्मपरायण होते हैं, उन्हीं के परिश्रम सफल होते हैं। इस अभिप्राय से यह वर्णन किया है कि परमात्मा उद्योगी पुरुषों के उद्योगों को सफल करें ॥४॥
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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (पवमान) हे सर्वपावकपरमात्मन् ! त्वं (भानुना) सदर्थप्रकाशकतया (वृषाहि) वेदवाण्या वर्षकः खलु (असि) असि (स्वाध्यः) सुबुद्धिमन्तो वयं (द्युमन्तं) दीप्तिमन्तं (त्वा) भवन्तं (हवामहे) स्तुमः ॥४॥