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अ॒स्मे वसू॑नि धारय॒ सोम॑ दि॒व्यानि॒ पार्थि॑वा । इन्दो॒ विश्वा॑नि॒ वार्या॑ ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

asme vasūni dhāraya soma divyāni pārthivā | indo viśvāni vāryā ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

अ॒स्मे इति॑ । वसू॑नि । धा॒र॒य॒ । सोम॑ । दि॒व्यानि॑ । पार्थि॑वा । इन्दो॒ इति॑ । विश्वा॑नि । वार्या॑ ॥ ९.६३.३०

ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:63» मन्त्र:30 | अष्टक:7» अध्याय:1» वर्ग:35» मन्त्र:5 | मण्डल:9» अनुवाक:3» मन्त्र:30


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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (इन्दो) हे ज्ञान-विज्ञानादि गुणसम्पन्न विद्वन् ! (सोम) हे परमात्मन् ! आप (पार्थिवा) पृथिवीसम्बन्धी (दिव्यानि) तथा द्युलोसम्बन्धी (विश्वानि वसूनि) सर्व रत्न (वार्या) जो वरण करने योग्य हैं, उनको (अस्मे) हमारे लिये (धारय) धारण कराइये ॥३०॥
भावार्थभाषाः - परमात्मा ने इस मन्त्र में इस बात का उपदेश किया है कि जो लोग सौम्य स्वभावयुक्त शूरवीरों के अनुयायी होकर देश का परिपालन करते हैं, वे नाना प्रकार के रत्नों को धारण करके ऐश्वर्यशाली होते हैं ॥३०॥ यह ६३ वाँ सूक्त और ३५ वाँ वर्ग समाप्त हुआ ॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

दिव्य व पार्थिव वसु

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (सोम) = वीर्यशक्ते ! तू (अस्मे) = हमारे लिये (दिव्यानि) = पार्थिवा दिव्य और पार्थिव (वसूनि) = वसुओं को (धारय) = धारण कर । विज्ञान के नक्षत्र व आत्मज्ञान का सूर्य ही दिव्य वसु हैं । पूर्ण स्वास्थ्य ही पार्थिव वसु है। सुरक्षित सोम हमें इन वसुओं को प्राप्त कराता है । [२] हे (इन्दो) = हमें शक्तिशाली बनानेवाले सोम ! तू (विश्वानि) = सब (वार्या) = वरणीय वसुओं को प्राप्त करा । तेरे द्वारा हमारा शरीर स्वस्थ हो, मन निर्मल हो तथा बुद्धि दीप्त हो। इस प्रकार यह सोम सब दृष्टिकोणों से हमारे जीवनों को उत्तम निवासवाला बनाये।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सुरक्षित सोम दिव्य व पार्थिव वसुओं को प्राप्त कराता है। यह सब वरणीय वसुओं का दाता है । अगले सूक्त में 'काश्यप मारीच' सोम का स्तवन करता है, ज्ञानी वासनाओं को विनष्ट करनेवाला-
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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (इन्दो) हे समस्तगुणसम्पन्न ! (सोम) परमात्मन् ! भवान् (दिव्यानि) दिवि भवानि (पार्थिवा) पृथिवीस्थानि (विश्वानि वसूनि) समस्तरत्नानि (वार्या) यानि वरणीयानि तानि (अस्मे) अस्मभ्यं (धारय) वितरतु ॥३०॥ इति त्रिषष्टितमं सूक्तं पञ्चत्रिंशो वर्गश्च समाप्तः ॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O Soma, lord of peace, prosperity and divine bliss, bring us all wealth, honour and excellence of the earth and heavenly light. O spirit of beauty and grace, bless us with all the wealth of success and fulfilment of our highest choice on earth and beyond.