ये ते॑ प॒वित्र॑मू॒र्मयो॑ऽभि॒क्षर॑न्ति॒ धार॑या । तेभि॑र्नः सोम मृळय ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
ye te pavitram ūrmayo bhikṣaranti dhārayā | tebhir naḥ soma mṛḻaya ||
पद पाठ
ये । ते॒ । प॒वित्र॑म् । ऊ॒र्मयः॑ । अ॒भि॒ऽक्षर॑न्ति । धार॑या । तेभिः॑ । नः॒ । सो॒म॒ । मृ॒ळ॒य॒ ॥ ९.६१.५
ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:61» मन्त्र:5
| अष्टक:7» अध्याय:1» वर्ग:18» मन्त्र:5
| मण्डल:9» अनुवाक:3» मन्त्र:5
366 बार पढ़ा गया
आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (सोम) हे सौम्यस्वभाव कर्मयोगिन् ! (ये ते ऊर्मयः) जो आपकी शरणरक्षक शक्तियें (पवित्रम्) शुद्ध हृदयवाले मनुष्य की ओर (धारया) प्रवाहरूप से (अभिक्षरन्ति) अभिगत होती हैं, (तेभिः) उन शक्तियों से (नः) हमको (मृळय) सुरक्षित करके सुखी करिये ॥५॥
भावार्थभाषाः - कर्म्मयोगी के उद्योगादि भावों को धारण करके स्वयं उद्योगी बनने का उपदेश इस मन्त्र में किया गया है ॥५॥
366 बार पढ़ा गया
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
सोम की ऊर्मियों का अभिक्षरण
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे सोम ! (ये) = जो (ते) = तेरी (ऊर्मयः) = तरंगें (धारया) = अपनी धारणशक्ति से (पवित्रम्) = पवित्र हृदयवाले पुरुष की (अभिक्षरन्ति) = ओर प्राप्त होती हैं, (तेभिः) = उन ऊर्मियों से (नः) = हमें (मृडय) = सुखी कर । [२] ये सोम की तरंगें शरीर में व्याप्त होती हैं तो शरीर रोगों व वासनाओं का शिकार नहीं होता । हम नीरोग व निर्मल हृदय बनते हैं। ऐसा ही जीवन सुखी होता है ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सोम शरीर में प्रवाहित होकर हमें नीरोग व निर्मल बनाता है। यही जीवन को सुखी बनाने का मार्ग है।
366 बार पढ़ा गया
आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (सोम) हे सौम्यप्रकृते कर्मयोगिन् ! (ये ते ऊर्मयः) याः शरणागतरक्षिका भवतः शक्तयः (पवित्रम्) शुद्धान्तःकरणवन्तं मनुष्यं (धारया) प्रवाहरूपेण (अभिक्षरन्ति) अभिगता भवन्ति। (तेभिः) ताभिः शक्तिभिः (नः) अस्मान् (मृळय) सुरक्षितान् विधाय सुखय ॥५॥
366 बार पढ़ा गया
डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - The streams of your piety, purity, peace and plenty rain in showers for the pure heart and soul in humanity. O Soma, with those showers, pray bless us with happiness, prosperity and all round well being.
