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न त्वा॑ दे॒वास॑ आशत॒ न मर्त्या॑सो अद्रिवः । विश्वा॑ जा॒तानि॒ शव॑साभि॒भूर॑सि॒ न त्वा॑ दे॒वास॑ आशत ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

na tvā devāsa āśata na martyāso adrivaḥ | viśvā jātāni śavasābhibhūr asi na tvā devāsa āśata ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

न । त्वा॒ । दे॒वासः॑ । आ॒श॒त॒ । न । मर्त्या॑सः । अ॒द्रि॒ऽवः॒ । विश्वा॑ । जा॒तानि॑ । शव॑सा । अ॒भि॒ऽभूः । अ॒सि॒ । न । त्वा॒ । दे॒वासः॑ । आ॒श॒त॒ ॥ ८.९७.९

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:97» मन्त्र:9 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:37» मन्त्र:4 | मण्डल:8» अनुवाक:10» मन्त्र:9


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'असीम, अचिन्त्य [अगम्य]' प्रभु

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (अद्रिवः) = आदरणीय प्रभो ! (त्वा) = आपको (देवास:) = सूर्य, चन्द्र, नक्षत्र आदि सब प्राकृतिक देव (न आशत) = नहीं व्याप सकते। आपकी महिमा इन्हीं में ही समाप्त नहीं हो जाती । (न मर्त्यासः) = न ही मनुष्य आपकी महिमा का व्यापन कर पाते हैं। मनुष्यों से भी आप अचिन्त्य व अगम्य होते हो। [२] हे प्रभो ! (विश्वा) = सब जातानि उत्पन्न पदार्थों व व्यक्तियों को आप (शवसा) = अपने बल से (अभिभूः असि) = अभिभूत करनेवाले हैं। ये सब (देवासः) = देव (त्वा) = आपको (न आशत) व्याप्त नहीं कर पाते।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु की महिमा न सूर्य-चन्द्र आदि से सीमित की जाती है, न मनुष्य उसका पूर्णतया चिन्तन कर पाते हैं।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O lord of clouds and thunder, the divines comprehend you not, the mortals comprehend you not. By virtue of your supreme power and glory you are above all things born in the world of existence. O lord supreme, the immortal divines comprehend you not.