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मा न॑ इन्द्र॒ परा॑ वृण॒ग्भवा॑ नः सध॒माद्य॑: । त्वं न॑ ऊ॒ती त्वमिन्न॒ आप्यं॒ मा न॑ इन्द्र॒ परा॑ वृणक् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

mā na indra parā vṛṇag bhavā naḥ sadhamādyaḥ | tvaṁ na ūtī tvam in na āpyam mā na indra parā vṛṇak ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

मा । नः॒ । इ॒न्द्र॒ । परा॑ । वृ॒ण॒क् । भव॑ । नः॒ । स॒ध॒ऽमाद्यः॑ । त्वम् । नः॒ । ऊ॒ती । त्वम् । इत् । नः॒ । आप्य॑म् । मा । नः॒ । इ॒न्द्र॒ । परा॑ । वृ॒ण॒क् ॥ ८.९७.७

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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:97» मन्त्र:7 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:37» मन्त्र:2 | मण्डल:8» अनुवाक:10» मन्त्र:7


हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'सच्चे बन्धु, सच्चे रक्षक'

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (इन्द्र) = परमैश्वर्यशालिन् प्रभो ! (नः) = हमें आप (मा परावृणक्) = छोड़ मत दीजिये। आप (नः) = हमारे (सधमाद्यः) = साथ होते हुए हृदयों में आनन्द को प्राप्त करानेवाले (भवा) = होइये। आपके साथ हृदयों में स्थित होते हुए हम आनन्द का अनुभव करें। [२] (त्वम्) = आप ही (नः) = हमारे (ऊती) = रक्षक हैं। (त्वं इत्) = आप ही (नः आप्यम्) = हमारे बन्धुत्ववाले हैं। वास्तविक बन्धु आप ही हैं। हे (इन्द्र) = परमैश्वर्यशालिन् प्रभो ! (नः) = हमें (मा परावृणक्) = मत छोड़ दीजिये । आपकी छत्रछाया में हम 'सत्य शिव व सुन्दर' जीवनवाले बनें।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु का साथ हमें सदा प्राप्त हो । प्रभु के साहचर्य में हम आनन्द का अनुभव करें। प्रभु ही हमारे रक्षक हैं, प्रभु ही सच्चे बन्धु हैं।

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Indra, lord supreme of truth, goodness and beauty, pray forsake us not, be with us as a friend in the great hall of life and joy, you are our protector, you alone are ultimately our end and aim worth attaining, pray do not forsake us.