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यद्वासि॑ रोच॒ने दि॒वः स॑मु॒द्रस्याधि॑ वि॒ष्टपि॑ । यत्पार्थि॑वे॒ सद॑ने वृत्रहन्तम॒ यद॒न्तरि॑क्ष॒ आ ग॑हि ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

yad vāsi rocane divaḥ samudrasyādhi viṣṭapi | yat pārthive sadane vṛtrahantama yad antarikṣa ā gahi ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

यत् । वा॒ । असि॑ । रो॒च॒ने । दि॒वः । स॒मु॒द्रस्य॑ । अधि॑ । वि॒ष्टपि॑ । यत् । पार्थि॑वे । सद॑ने । वृ॒त्र॒ह॒न्ऽत॒म॒ । यत् । अ॒न्तरि॑क्षे । आ । ग॒हि॒ ॥ ८.९७.५

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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:97» मन्त्र:5 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:36» मन्त्र:5 | मण्डल:8» अनुवाक:10» मन्त्र:5


हरिशरण सिद्धान्तालंकार

हृदय में प्रभु दर्शन

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (वृत्रहन्तम) = वासनाओं के अधिक से अधिक विनाशक प्रभो! आप (यत्) = जो (वा) = निश्चय से (दिवः रोचने) = द्युलोक के दीप्त प्रदेश में (असि) = विद्यमान हैं तथा (समुद्रस्य) = इस आकाश [मध्यलोक] के (विष्टपि) = लोक में हैं, (यत्) = जो (पार्थिवे सदने) = इस पृथिवीरूप गृह में हैं। आपकी सत्ता त्रिलोकी में है। [२] (यत्) = जो आप (अन्तरिक्षे) = हमारे हृदयान्तरिक्षों में भी (आगहि) = प्राप्त होते हैं। हम अपने हृदयों में आपकी सत्ता को अनुभव करें। आपकी सर्वव्यापकता का स्मरण करते हुए आपको हृदयों में देखने के लिये यत्नशील हों। हृदयों में आसीन हो । हृदयों में प्रभु का दर्शन
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सर्वत्र त्रिलोकी में व्यापक प्रभु हमारे करते हुए हम अपने जीवनों को पवित्र बनायें।

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Whether you are in some region of light in heaven or in some region of the skies above, or in the depth of seas or anywhere on the surface of earth, O, greatest destroyer of darkness, evil and suffering, come and be with us.