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देवता: इन्द्र: ऋषि: नोधा छन्द: पङ्क्तिः स्वर: पञ्चमः
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योद्धा॑सि॒ क्रत्वा॒ शव॑सो॒त दं॒सना॒ विश्वा॑ जा॒ताभि म॒ज्मना॑ । आ त्वा॒यम॒र्क ऊ॒तये॑ ववर्तति॒ यं गोत॑मा॒ अजी॑जनन् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

yoddhāsi kratvā śavasota daṁsanā viśvā jātābhi majmanā | ā tvāyam arka ūtaye vavartati yaṁ gotamā ajījanan ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

योद्धा॑ । अ॒सि॒ । क्रत्वा॑ । शव॑सा । उ॒त । दं॒सना॑ । विश्वा॑ । जा॒ता । अ॒भि । म॒ज्मना॑ । आ । त्वा॒ । अ॒यम् । अ॒र्कः । ऊ॒तये॑ । व॒व॒र्त॒ति॒ । यम् । गोत॑माः । अजी॑जनन् ॥ ८.८८.४

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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:88» मन्त्र:4 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:11» मन्त्र:4 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:4


हरिशरण सिद्धान्तालंकार

क्रत्वा शवसा दंसना

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे प्रभो ! आप (क्रत्वा) = अपने प्रज्ञान से (उत) = और (शवसा) = बल से (योद्धा असि) = शत्रुओं पर संप्रहार करनेवाले हैं। हे प्रभो! आप (विश्वा जाता) = सब प्रादुर्भूत होनेवाली वासनाओं को (दंसना) = अपने कर्मों से तथा (मज्मना) = शत्रुओं को मसल देनेवाले बल से (अभि) [ भवसि ] = अभिभूत करनेवाले हैं। [२] (अयम्) = यह (अर्थ:) = स्तोता (ऊतये) = अपने रक्षण के लिये (त्वा) = आपको (आवर्तति) = अपने अभिमुख आवृत्त करता है। उन आपको यह अपने अभिमुख करने के लिये यत्नशील होता है, (यम्) = जिनको (गोतमाः) = प्रशस्त ज्ञानेन्द्रियोंवाले (अजीजनन्) = अपने हृदयों में प्रादुर्भूत करते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम प्रभु का स्तवन करें। प्रभु हमें 'प्रज्ञान शक्ति व क्रियाशीलता' प्राप्त करायेंगे और इस प्रकार हमारे वासनारूप शत्रुओं का विनाश करेंगे।

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - You are a victorious warrior by your strength and yajnic karma. You are supreme over all things bom of your wondrous power and majesty. This worshipper adores you for the sake of protection and advancement, the lord whom the imaginative wise realise in their soul at will.