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देवता: इन्द्र: ऋषि: नोधा छन्द: बृहती स्वर: मध्यमः
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तं वो॑ द॒स्ममृ॑ती॒षहं॒ वसो॑र्मन्दा॒नमन्ध॑सः । अ॒भि व॒त्सं न स्वस॑रेषु धे॒नव॒ इन्द्रं॑ गी॒र्भिर्न॑वामहे ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

taṁ vo dasmam ṛtīṣahaṁ vasor mandānam andhasaḥ | abhi vatsaṁ na svasareṣu dhenava indraṁ gīrbhir navāmahe ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

तम् । वः॒ । द॒स्मम् । ऋ॒ति॒ऽसह॑म् । वसोः॑ । म॒न्दा॒नम् । अन्ध॑सः । अ॒भि । व॒त्सम् । न । स्वस॑रेषु । धे॒नवः॑ । इन्द्र॑म् । गीः॒ऽभिः । न॒वा॒म॒हे॒ ॥ ८.८८.१

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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:88» मन्त्र:1 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:11» मन्त्र:1 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:1


हरिशरण सिद्धान्तालंकार

दस्मम् ऋतीषहम्

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (तम्) = उस (इन्द्रम्) = परमैश्वर्यशाली प्रभु को (गीर्भिः) = स्तुतिवाणियों के द्वारा (स्वसरेषु अभिर्नवामहे) = दिनों में [सूर्यकर्तृकेषु दिवसेषु नि० ] प्रातः-सायं [अभि] स्तुत करते हैं- प्रभु की ओर जाते हैं, प्रभु की उपासना में बैठते हैं। इस प्रकार प्रभु की ओर जाते हैं (न) = जैसे स्वसरेषु [सुष्ठु अस्यन्ते प्रेर्यन्ते गावः अत्र ] गोष्ठों में (धेनवः) = गौवें (वत्सम्) = बछड़े की ओर जाती हैं। जिस प्रकार प्रेम से भरी हुई गौवें जाती हैं, उसी प्रकार प्रेम से परिपूर्ण हृदयोंवाले हम प्रभु की ओर जानेवाले बनें। [२] उस प्रभु की ओर हम जायें, जो (वः दस्यम्) = तुम सबके दुःखों का उपक्षय करनेवाले हैं। (ऋतीबहम्) = [ऋतयो बाधकाः शत्रवः] काम-क्रोध आदि बाधक शत्रुओं का पराभव करनेवाले (वसोः) = हमारे निवासों को उत्तम बनानेवाले (अन्धसः) = सोम [वीर्य] के द्वारा (मन्दानम्) = हमें हैं। आनन्दित करनेवाले हैं। वस्तुतः प्रभु काम-क्रोध आदि को विनष्ट करके हमें सोमरक्षण द्वारा सब दुःखों से दूर व आनन्द से परिपूर्ण जीवनवाला बनाते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम प्रातः - सायं प्रभु की उपासना करें। प्रभु हमारी वासनाओं को विनष्ट करके हमारे अन्दर सोम का रक्षण करते हैं और हमारे दुःखों को दूर करके हमें आनन्दमय जीवनवाला बनाते हैं।

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - We invoke and call upon Indra eagerly as cows call for their calves in the stalls, and with songs of adoration over night and day we glorify him, lord glorious, omnipotent power fighting for truth against evil forces, and exhilarated with the bright soma of worship offered by celebrant humanity.