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यू॒यं हि ष्ठा सु॑दानव॒ इन्द्र॑ज्येष्ठा अ॒भिद्य॑वः । अधा॑ चिद्व उ॒त ब्रु॑वे ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
yūyaṁ hi ṣṭhā sudānava indrajyeṣṭhā abhidyavaḥ | adhā cid va uta bruve ||
पद पाठ
यू॒यम् । हि । स्थ । सु॒ऽदा॒न॒वः॒ । इन्द्र॑ऽज्येष्ठाः । अ॒भिऽद्य॑वः । अध॑ । चि॒त् । वः॒ । उ॒त । ब्रु॒वे॒ ॥ ८.८३.९
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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:83» मन्त्र:9
| अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:4» मन्त्र:4
| मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:9
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
इन्द्रज्येष्ठा, अभिद्यवः, सुदानवः [देवाः]
पदार्थान्वयभाषाः - [१] दे देवो! (यूयम्) = आप (हि) = निश्चय से (इन्द्रज्येष्ठा:) = उस परमैश्वर्यशाली प्रभु को ज्येष्ठत्व देनेवाले (अभिद्यवः) = [अभिगत दीप्तयः] प्राप्त ज्ञान ज्योतिवाले तथा (सुदानवः) = बुराइयों का सम्यक् खण्डन करनेवाले हो। [२] (अधा चित्) = सो अब निश्चय से (वः उपब्रुवे) = आपका ही मैं स्तवन करता हूँ । (उत) = और आप से ही अपने जीवन के निर्माण के लिये प्रार्थना करता हूँ। आप प्रभु की उपासना के द्वारा प्राप्त ज्ञान ज्योतिवाले हो । आप हमारे जीवनों में भी बुराइयों का खण्डन करते हुए उन्हें उज्वल बनाने का अनुग्रह करो।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- देव वे हैं जो प्रभु को ज्येष्ठ बनाकर ज्ञान को प्राप्त करते हैं और बुराइयों का अपने जीवन में खण्डन करते हैं। इनके सम्पर्क में हम भी देव बनें। देव बनकर महादेव की प्राप्ति की प्रबल कामनावाले हम 'उशना' बनें (कामयमान) । 'उशना ' ही काम्य है-कविपुत्र है- अतिशयेन क्रान्तदर्शी है। यह प्रभु की प्रार्थना करता हुआ कहता है-
डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - O generous Vishvedevas, you, with Indra, lord omnipotent as supreme, are and abide as heavenly and brilliant in knowledge and divinity. That’s why I speak, celebrate and pray to you.
