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अधि॑ न इन्द्रैषां॒ विष्णो॑ सजा॒त्या॑नाम् । इ॒ता मरु॑तो॒ अश्वि॑ना ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

adhi na indraiṣāṁ viṣṇo sajātyānām | itā maruto aśvinā ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

अधि॑ । नः॒ । इ॒न्द्र॒ । ए॒षा॒म् । विष्णो॒ इति॑ । स॒ऽजा॒त्या॑नाम् । इ॒त । मरु॑तः । अश्वि॑ना ॥ ८.८३.७

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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:83» मन्त्र:7 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:4» मन्त्र:2 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:7


हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'इन्द्र, विष्णु, मरुतों व अश्विना' के साथ बन्धुत्व

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (इन्द्र) = जितेन्द्रियता के दिव्य भाव ! (विष्णो) = [विष् व्याप्तौ] व्यापकता के दिव्य भाव ! (मरुतः) = [मित राविणः] परिमित बोलने के दिव्य भावो ! तथा (अश्विना) = प्राणापानो! आप सब (एषाम्) = इन (सजात्यानां नः) = आपके ही समान जातिवाले भाई, मित्र आदि भूत हमारा (अधि इत) = [to take care of] ध्यान करनेवाले होओ। [२] हम 'इन्द्र, विष्णु, मरुत् व अश्विना ' के ही बन्धु बनें। इनके द्वारा हमारा रक्षण किया जाये। हम जितेन्द्रिय-उदार [विशाल हृदय] - कम बोलनेवाले व प्राणापान की साधना करनेवाले बनें।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम 'इन्द्र, विष्णु, मरुतों व प्राणापान' की बन्धुता को प्राप्त करें, अर्थात् 'जितेन्द्रिय, उदार हृदय, मितरावी व प्राणापान की साधना करनेवाले' बनें। यही रक्षण का मार्ग है।

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Indra, lord of glory, giver of power and honour, Vishnu, omnipresent divinity, Maruts, winds and vibrant humanity, Ashvins, harbingers of the new dawn, take it that we have come in advance of these homogeneous communities and accept us as your own.