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व॒यमिद्व॑: सुदानवः क्षि॒यन्तो॒ यान्तो॒ अध्व॒न्ना । देवा॑ वृ॒धाय॑ हूमहे ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

vayam id vaḥ sudānavaḥ kṣiyanto yānto adhvann ā | devā vṛdhāya hūmahe ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

व॒यम् । इत् । वः॒ । सु॒ऽदा॒न॒वः॒ । क्षि॒यन्तः॑ । यान्तः॑ । अध्व॑न् । आ । देवाः॑ । वृ॒धाय॑ । हू॒म॒हे॒ ॥ ८.८३.६

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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:83» मन्त्र:6 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:4» मन्त्र:1 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:6


हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'क्षियन्तः-यान्तः' [देवान् हूमहे]

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (सुदानवः) = [दाप् लवने] बुराइयों का अच्छी प्रकार छेदन करनेवाले देवो ! (वयम्) = हम (इत्) = निश्चय से (क्षियन्तः) = घरों पर निवास करते हुए [क्षि निवासे] व यज्ञादि कर्मों में गतिवाले होते हुए [क्षि गतौ ] तथा इन यज्ञादि कर्मों के लिये सामग्री को जुटाने के लिये (अध्वन् आयान्तः) = मार्ग पर चारों ओर गति करते हुए, अर्थात् विविध कर्मों में लगे हुए (वः हूमहे) = आपको ही पुकारते हैं । [२] हे (देवा:) = दिव्य वृत्ति के पुरुषो! आप ही (वृधाय) = हमारी वृद्धि के लिये होते हो अथवा 'मित्र, वरुण व अर्यमा' आदि दिव्यभाव ही हमारी वृद्धि के लिये होते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - घर पर यज्ञादि कर्मों के लिये निवास करते हुए तथा साधन संग्रह के लिये मार्गों पर चलते हुए हम देवों का आह्वान करते हैं। इनका रक्षण ही हमारी वृद्धि के लिये होता है।

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O Vishvedevas, generous and leading divinities of earth and heaven, whether we abide in the home or go out on the paths of the wide world, we call upon you only, for the sake of guidance and advancement.