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वा॒मं नो॑ अस्त्वर्यमन्वा॒मं व॑रुण॒ शंस्य॑म् । वा॒मं ह्या॑वृणी॒महे॑ ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

vāmaṁ no astv aryaman vāmaṁ varuṇa śaṁsyam | vāmaṁ hy āvṛṇīmahe ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

वा॒मम् । नः॒ । अ॒स्तु॒ । अ॒र्य॒म॒न् । वा॒मम् । व॒रु॒ण॒ । शंस्य॑म् । वा॒मम् । हि । आ॒ऽवृ॒णी॒महे॑ ॥ ८.८३.४

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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:83» मन्त्र:4 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:3» मन्त्र:4 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:4


हरिशरण सिद्धान्तालंकार

वामम् [आवृणीमहे]

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (अर्यमन्) [अरीन् यच्छति] = संयम के देव! (नः) = हमारे लिये (वामं अस्तु) = सुन्दर [वननी - संभजनीय] धन प्राप्त हो। हे (वरुण) = द्वेष व पाप के निवारण के दिव्य भाव ! हमारे लिये (वामम्) = वननीय [सुन्दर] तथा (शंस्यम्) = प्रशंसनीय धन प्राप्त हो। हम, हे देवो ! (वामम्) = संभजनीय सुन्दर धन का (हि) = ही (आवृणीमहे) = सर्वथा वरण करते हैं। हम यही चाहते हैं कि हमें सुन्दर प्रशस्त धन प्राप्त हों।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हमें प्रशस्त धन प्राप्त हो ।

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O divine leader of advancement, Aryaman, let our action for progress be noble and successful. O Varuna, divine power of judgement and value, may our honour and reputation be good and noble. We opt for only what is good, noble and gracefully successful.