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ते न॑: सन्तु॒ युज॒: सदा॒ वरु॑णो मि॒त्रो अ॑र्य॒मा । वृ॒धास॑श्च॒ प्रचे॑तसः ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
te naḥ santu yujaḥ sadā varuṇo mitro aryamā | vṛdhāsaś ca pracetasaḥ ||
पद पाठ
ते । नः॒ । स॒न्तु॒ । युजः॑ । सदा॑ । वरु॑णः । मि॒त्रः । अ॒र्य॒मा । वृ॒धासः॑ । च॒ । प्रऽचे॑तसः ॥ ८.८३.२
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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:83» मन्त्र:2
| अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:3» मन्त्र:2
| मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:2
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
'वृधासः+प्रचेतसः' [देवाः]
पदार्थान्वयभाषाः - [१] (ते) = वे (वरुणः) = द्वेष का निवारण करनेवाली देवता, (मित्रः) = स्नेह की देवता तथा (अर्यमा) = संयम की देवता [ अरीन् यच्छति] (नः) = हमारे (सदा) = सदा (युजः सन्तु) = साथी हों - इनका योग हमें सदा प्राप्त हो। [२] ये देव (वृधासः) = हमारी वृद्धि करनेवाले हैं - हमारे शत्रुओं का छेदन करनेवाले हैं [वर्धनम् = Cutting, Dividing], (च) = तथा (प्रचेतसः) = हमारी चेतना को प्रकृष्ट करनेवाले हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - माता, पिता, आचार्य आदि के रक्षण में हम 'निर्देषता, स्नेह व संयम' वाले बनें। ये दिव्य भाव हमारी वृद्धि का कारण होंगे और हमें प्रकृष्ट चेतनावाला करेंगे।
डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - May Varuna, powers of law and justice, wisdom and discrimination, Mitra, powers of light, love and friendship, and Aryama, dynamic forces of nature and humanity, guides and path makers of life, all of them being powers of omniscience and givers of knowledge and awareness, be our friends and cooperators and help us advance in life.
