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दे॒वाना॒मिदवो॑ म॒हत्तदा वृ॑णीमहे व॒यम् । वृष्णा॑म॒स्मभ्य॑मू॒तये॑ ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
devānām id avo mahat tad ā vṛṇīmahe vayam | vṛṣṇām asmabhyam ūtaye ||
पद पाठ
दे॒वाना॑म् । इत् । अवः॑ । म॒हत् । तत् । आ । वृ॒णी॒म॒हे॒ । व॒यम् । वृष्णा॑म् । अ॒स्मभ्य॑म् । ऊ॒तये॑ ॥ ८.८३.१
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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:83» मन्त्र:1
| अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:3» मन्त्र:1
| मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:1
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
देवों का महान् रक्षण
पदार्थान्वयभाषाः - [१] (देवानाम्) = देवों का माता-पिता, आचार्य आदि का [मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, आचार्य देवो भव, अतिथि देवो भव] (अवः) = रक्षण (इत्) = निश्चय से (महत्) = अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। (वयम्) = हम (तत्) = उस रक्षण का (आवृणीमहे) = सर्वथा वरण करते हैं। प्रभुकृपा से इन देवों का रक्षण हमें सदा प्राप्त रहे। [२] (वृष्णाम्) = सुखों के वर्षण करनेवाले देवों का यह रक्षण (अस्मभ्यम्) = हमारे लिये (ऊतये) = रक्षण के लिये होता है। ५ वर्ष तक माता के, ८ वर्ष तक पिता के, २४ वर्ष तक आचार्यों के तदनन्तर गृहस्थ में विद्वान् अतिथियों के रक्षण में हमारा जीवन सुरक्षित रहता है - हम विलास की ओर नहीं बह जाते।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सुखों के वर्षक माता-पिता, आचार्य आदि देवों का रक्षण महत्त्वपूर्ण होता है- हम इस रक्षण को प्राप्त करके सुरक्षित जीवन बिता सकें। संसार के विषयों में फँसने से बचे रहें।
डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - We choose for ourselves the grand patronage and protection of the generous brilliancies of nature and humanity for our safety, security and advancement.
