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आ त्व॑शत्र॒वा ग॑हि॒ न्यु१॒॑क्थानि॑ च हूयसे । उ॒प॒मे रो॑च॒ने दि॒वः ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

ā tv aśatrav ā gahi ny ukthāni ca hūyase | upame rocane divaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

आ । तु । अ॒स॒त्रो॒ इति॑ । आ । ग॒हि॒ । नि । उ॒क्थानि॑ । च॒ । हू॒य॒से॒ । उ॒प॒ऽमे । रो॒च॒ने । दि॒वः ॥ ८.८२.४

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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:82» मन्त्र:4 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:1» मन्त्र:4 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:4


हरिशरण सिद्धान्तालंकार

उपमे रोचने दिवः

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (अशत्रो) = सब काम-क्रोध आदि शत्रुओं को विनष्ट करनेवाले सोम! (आ आगहि) = तु तू हमें सर्वथा प्राप्त हो ही । [२] (च) = और तू हमें (दिवः) = ज्ञान के (उपमे) = अन्तिकतम (रोचने) = दीप्त स्थान में- हृदयदेश में (उक्थानि निहूयसे) = स्तोत्रों के प्रति पुकारता है, अर्थात् सुरक्षित सोम हमारे ज्ञान को बढ़ाता है और हमें प्रभुस्तवन की वृत्तिवाला बनाता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- शरीर में सुरक्षित सोम हमें क्रोध आदि शत्रुओं को पराजित करने में समर्थ करता है। हमारे ज्ञान को बढ़ाता है और हमें प्रभुस्तवन की वृत्तिवाला बनाता है।

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Indra, happy and free from all foes, distractions and contradictions, come in response to the hymns of adoration, invited to the sublime glory of the light of heaven.