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उ॒तो न्व॑स्य॒ यत्प॒दं ह॑र्य॒तस्य॑ निधा॒न्य॑म् । परि॒ द्यां जि॒ह्वया॑तनत् ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
uto nv asya yat padaṁ haryatasya nidhānyam | pari dyāṁ jihvayātanat ||
पद पाठ
उ॒तो इति॑ । नु । अ॒स्य॒ । यत् । प॒दम् । ह॒र्य॒तस्य॑ । नि॒ऽधा॒न्य॑म् । परि॑ । द्याम् । जि॒ह्वया॑ । अ॒त॒न॒त् ॥ ८.७२.१८
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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:72» मन्त्र:18
| अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:17» मन्त्र:3
| मण्डल:8» अनुवाक:8» मन्त्र:18
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
निधान्यं पदम्
पदार्थान्वयभाषाः - [१] (उत उ) = और निश्चय से (अस्य) = इस, गतमन्त्र के अनुसार, सोम का रक्षण करनेवाले (हर्यतस्य) = गतिशील व प्रभुप्राप्ति की कामनावाले पुरुष का (यत् पदं) = जो पद होता है वह (निधान्यम्) = उस विश्व के पर निधान को प्राप्त करानेवाला होता है। यह अपने सब कर्मों को इस प्रकार करता है कि प्रभु की ओर बढ़ता चलता है। [२] यह (जिह्वया) = अपनी जिह्वा से (द्याम्) = ज्ञान को (परि अतनत्) = चारों ओर फैलानेवाला होता है। स्वयं जितेन्द्रियता से सोम का रक्षण करता हुआ ज्ञान को बढ़ाता है और ज्ञान का प्रसार करता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम प्रभु की ओर ही चलनेवाले बनें तथा ज्ञान का विस्तार करनेवाले हों। यह गोपवन- ज्ञान की वाणियों का द्वारा पवित्रता को करनेवाला होता है। काम, क्रोध, लोभ से ऊपर उठ जाने से 'आत्रेय' होता है। 'कर्णाविमौ नासिके चक्षणी मुखम्' इन सातों को संयमरज्जु से बाँधने वाला यह 'सप्तवधि' है। यह अश्विनौ का आराधन करता है-
डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - And then let the devotee with holy voice celebrate and glorify this state of divine fulfilment, promised of Agni, destined for man, unto heaven.
