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अधु॑क्षत्पि॒प्युषी॒मिष॒मूर्जं॑ स॒प्तप॑दीम॒रिः । सूर्य॑स्य स॒प्त र॒श्मिभि॑: ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
adhukṣat pipyuṣīm iṣam ūrjaṁ saptapadīm ariḥ | sūryasya sapta raśmibhiḥ ||
पद पाठ
अधु॑क्षत् । पि॒प्युषी॑म् । इष॑म् । ऊर्ज॑म् । स॒प्तऽप॑दीम् । अ॒रिः । सूर्य॑स्य । स॒प्त । र॒श्मिऽभिः॑ ॥ ८.७२.१६
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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:72» मन्त्र:16
| अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:17» मन्त्र:1
| मण्डल:8» अनुवाक:8» मन्त्र:16
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
इषम्, ऊर्जम्, सप्तपदीम्
पदार्थान्वयभाषाः - [१] (अरि:) = [ऋ गतौ ] यह निरन्तर गतिशील उपासक (पिप्युषीम्) = आप्यायन करनेवाले- वर्धन करनेवाले अन्न को ही अपने में (अधुक्षत्) = प्रपूरित करता है। इस अन्न का सेवन करता हुआ यह (ऊर्जम्) = बल व प्राणशक्ति को प्राप्त करता है। [२] यह [अरि=] क्रियाशील पुरुष (सूर्यस्य सप्त रश्मिभिः) = सूर्य की सातों किरणों के सम्पर्क में रहता हुआ (सप्तपदीम्) = 'भूः भुव, स्व, मह:, जनः, तपः, सत्यम्' - 'स्वास्थ्य ज्ञान - जितेन्द्रियता - हृदय की विशालता-विकास-तप व सत्य' रूप सात पदों को [अधुक्षत् ] = प्रपूरित करता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु के उपासक बनकर सूर्य किरणों के सम्पर्क में जीवन बिताते हुए हम उत्तम अन्न का सेवन करें और अपने अन्दर बल व प्राणशक्ति का दोहन करें। इस जीवन में हम 'स्वास्थ्य- ज्ञान- जितेन्द्रियता- उदारता-विकास-तप व सत्य' का धारण करें।
डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - May the lord of faith and power accept the offering of nourishing food and energy through seven stages of nature’s evolution, and by seven-rayed chemistry of the sun turn it into showers of spiritual fulfilment for the yajaka.
