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अ॒भ्यार॒मिदद्र॑यो॒ निषि॑क्तं॒ पुष्क॑रे॒ मधु॑ । अ॒व॒तस्य॑ वि॒सर्ज॑ने ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
abhyāram id adrayo niṣiktam puṣkare madhu | avatasya visarjane ||
पद पाठ
अ॒भि॒ऽआर॑म् । इत् । अद्र॑यः । निऽसि॑क्तम् । पुष्क॑रे । मधु॑ । अ॒व॒तस्य॑ । वि॒ऽसर्ज॑ने ॥ ८.७२.११
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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:72» मन्त्र:11
| अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:16» मन्त्र:1
| मण्डल:8» अनुवाक:8» मन्त्र:11
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
जीवन्मुक्त का मधुर हृदय
पदार्थान्वयभाषाः - [१] (अद्रयः) = [आद्रियमाणाः] प्रभु का पूजन [worship] करनेवाले (अभि+आरम् इत्) = उस प्रभु की ओर जाकर ही (अवतस्य) = इस शरीर के (विसर्जने) = विसर्जन में समर्थ होते हैं। शरीर को वे ही छोड़ पाते हैं- इस जन्म-मरण के चक्र से वे ही छूट पाते हैं, जो प्रभु का उपासन करते हैं। [२] इन उपासकों के (पुष्करे) = हृदयकमल में अथवा हृदयान्तरिक्ष में (मधुः निषिक्तम्) = मधु सिक्त हुआ हुआ होता है, अर्थात् इनके हृदय माधुर्य से परिपूर्ण होते हैं। एक उपासक राग-द्वेष से शून्य हृदयवाला होता हुआ सबके प्रति माधुर्य को लिए हुए होता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ-उपासक का हृदय सबके प्रति मधुरता से परिपूर्ण होता है। ये जीवन्मुक्त हो जाते हैं ।
डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - When the fount of the divine reservoir is released toward the quiet mind of the devotee, then the lord of clouds and soma fills the lotus of his heart with the honeyed ecstasy of divine grace.
