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सि॒ञ्चन्ति॒ नम॑साव॒तमु॒च्चाच॑क्रं॒ परि॑ज्मानम् । नी॒चीन॑बार॒मक्षि॑तम् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

siñcanti namasāvatam uccācakram parijmānam | nīcīnabāram akṣitam ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

सि॒ञ्चन्ति॑ । नम॑सा । अ॒व॒तम् । उ॒च्चाऽच॑क्रम् । परि॑ऽज्मानम् । नी॒चीन॑ऽबारम् । अक्षि॑तम् ॥ ८.७२.१०

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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:72» मन्त्र:10 | अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:15» मन्त्र:5 | मण्डल:8» अनुवाक:8» मन्त्र:10


हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'उच्चाचक्रं नीचीनबारम्' अवतम्

पदार्थान्वयभाषाः - [१] यह शरीर आत्मा का निवास स्थान होने से रक्षणीय है, सो 'अवत' है। इसमें मूलाधार चक्र से ऊपर उठते-उठते हम सहस्रार चक्र तक पहुँचते हैं। ये चक्र आठ हैं 'अष्टचक्रा नवद्वारा०'। 'शिश्न व गुदा' नामक दो मलद्वार इसमें नीचे की ओर हैं, सो यह 'उच्चाचक्र' व 'नीचीनवद्वार' है। विविध गतियोंवाला होने से यह 'परिज्मा' है। [२] (अवतम्) = रक्षणीय इस शरीर को (नमसा) = प्रभु के प्रति नमन के द्वारा (सिञ्चन्ति) = शरीर में सुरक्षित सोमशक्ति से (सिञ्चन्ति) = सींचते हैं। यह शक्ति ही इस शरीर का रक्षण करती है। [३] यह शरीर (उच्चाचक्रम्) = एक के ऊपर दूसरा, इस प्रकार ऊपर और ऊपर आठ चक्रोंवाला है। (परिज्मानम्) = चारों ओर गतिवाला है। (नीचीनबारम्) = नीचे अधोमुख दो मलद्वारोंवाला है और (अक्षितम्) = न क्षीण होनेवाला व पुष्ट है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- शरीर को हमें शक्ति के रक्षण के द्वारा परिपुष्ट रखना है। निवासस्थान के रूप में यह रक्षणीय है। इसमें आठ चक्र हैं। नीचे दो मलद्वार हैं। यह समन्तात् गतिवाला है - गति के धारण से ही इसमें शक्ति बनी रहती है।

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - With homage the devotees serve Agni, radiating and vibrating on high, pervading all round, full of peace and joy, just an inverted well, inexhaustible, with release of showers on the down side for the celebrants.