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त्वं र॒यिं पु॑रु॒वीर॒मग्ने॑ दा॒शुषे॒ मर्ता॑य । प्र णो॑ नय॒ वस्यो॒ अच्छ॑ ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

tvaṁ rayim puruvīram agne dāśuṣe martāya | pra ṇo naya vasyo accha ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

त्वम् । र॒यिम् । पु॒रु॒ऽवीर॑म् । अग्ने॑ । दा॒शुषे॑ । मर्ता॑य । प्र । नः॒ । न॒य॒ । वस्यः॑ । अच्छ॑ ॥ ८.७१.६

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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:71» मन्त्र:6 | अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:12» मन्त्र:1 | मण्डल:8» अनुवाक:8» मन्त्र:6


शिव शंकर शर्मा

इससे धन की याचना करते हैं।

पदार्थान्वयभाषाः - (ऊर्जोनपात्) हे बलप्रद (भद्रशोचे) हे कल्याणकारि तेजोयुक्त प्रभो ! (सः) सर्वत्र दीप्यमान तू (विश्वेभिः+देवेभिः) समस्त पदार्थों के साथ (नः) हम प्राणियों को (विश्ववारम्) सर्ववरणीय=सर्वग्रहणीय (रयिम्) सम्पत्ति (देहि) दे ॥३॥
भावार्थभाषाः - ऊर्ज्=बल। नपात्=न गिरानेवाला। जो बल को न गिरावे, वह ऊर्जोनपात् अर्थात् बलप्रद है। देव=यह शब्द सर्वपदार्थवाचक है। मन्त्र का आशय यह है कि सकल प्राणियों के साथ मुझको भी साहाय्य दे ॥३॥

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

वस्यः अच्छ

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (अग्ने) = अग्रणी प्रभो! (त्वं) = आप (दाशुषे मर्ताम्) = दाश्वान् दानशील मनुष्य के लिए (पुरुवीरं) = पालक व पूरक वीरता से युक्त (रयिं) = धन को अथवा वीर सन्तानोंवाले धन को प्राप्त कराते हैं। [२] हे प्रभो! आप (नः) = हमें भी (वस्यः) = उत्कृष्ट धन की (अच्छ) = ओर प्रयाण प्रकर्षेण ले चलिये।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम दाश्वान् [दानशील] बनें। प्रभु हमें वीर सन्तानोंवाले धन को प्राप्त कराएँगे। प्रभु सदा हमें प्रशस्त धन की ओर ले चलें।

शिव शंकर शर्मा

अनया धनं याचते।

पदार्थान्वयभाषाः - हे ऊर्जोनपात्=बलस्य न पातयितः किन्तु बलस्य प्रदातः ! हे भद्रशोचे=कल्याणकारि तेजोयुक्त देव ! स त्वम्। नोऽस्मभ्यम्। विश्वेभिर्देवेभिः=सर्वैः पदार्थैः सह। विश्ववारं=विश्ववरणीयं रयिं देहि ॥३॥

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Agni, lead us to wealth, brave happy progeny and the perfect joy of life for men of charity and unbounded generosity.