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सोम॒ इद्व॑: सु॒तो अ॑स्तु॒ कल॑यो॒ मा बि॑भीतन । अपेदे॒ष ध्व॒स्माय॑ति स्व॒यं घै॒षो अपा॑यति ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

soma id vaḥ suto astu kalayo mā bibhītana | aped eṣa dhvasmāyati svayaṁ ghaiṣo apāyati ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

सोमः॑ । इत् । वः॒ । सु॒तः । अ॒स्तु॒ । कल॑यः । मा । बि॒भी॒त॒न॒ । अप॑ । इत् । ए॒षः ध्व॒स्मा । अ॒य॒ति॒ । स्व॒यम् । घ॒ । ए॒षः । अप॑ । अ॒य॒ति॒ ॥ ८.६६.१५

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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:66» मन्त्र:15 | अष्टक:6» अध्याय:4» वर्ग:50» मन्त्र:5 | मण्डल:8» अनुवाक:7» मन्त्र:15


शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - (तुविकूर्मिन्) हे बहुकर्म ! हे अनन्तकर्मा (इन्द्र) हे इन्द्र ! (त्वे) तुझमें (आशसः) विद्यमान आशाएँ (पूर्वीः+चित्) पूर्ण ही हैं, (ऊतयः) तुझमें रक्षाएँ भी पूर्णरूप से विद्यमान हैं, अतः आशा और रक्षा के लिये (हवन्ते) तुझको लोग बुलाते, पूजते और स्तुति गाते हैं। (हे वसो) हे सबको वास देनेवाले (शविष्ठ) हे महाशक्ते हे बलाधिदेव भगवन् ! (अर्य्यः) वह माननीय देव तू (तिरः+चित्) गुप्तरूप से भी (सवना+आगहि) हमारे यज्ञों में आ और (मे+हवम्) मेरे आह्वान, निवेदन, प्रार्थना आदि को (श्रुधि) सुन ॥१२॥

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'दारिद्र्य - भूख- निन्दा' से बचाव

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (शचिष्ठ) = शक्तिशालिन् प्रभो ! (त्वं) = आप (नः) = हमें (अस्या:) = इस (अमते:) = [Poverty] दारिद्र्य से (उत) = और (क्षुधः) = भूख से तथा (अभिशस्ते:) = निन्दा से (अवस्पृधि) = पृथक् करिये। [२] हे प्रभो! आप ही (गातुवित्) = मार्ग को जाननेवाले हैं। सो (त्वं) = आप (नः) = हमें (ऊती) = रक्षण के हेतु से (तव) = आपकी (चित्रया धिया) = ज्ञान को देनेवाली बुद्धि से (शिक्षा) = शिक्षित करिये व शक्तिशाली बनाने की कामना कीजिए। आपसे उत्तम बुद्धि को पाकर हम अपना रक्षण कर पाएँ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु हमें दारिद्र्य, भूख व निन्दा से बचाएँ। वह मार्ग का ज्ञान देनेवाले प्रभु हमें चेतना देनेवाली बुद्धि को प्राप्त कराके शिक्षित करें।

शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - हे तुविकूर्मिन्=हे बहुकर्मन् ! हे महाशक्ते ! हे इन्द्र ! त्वे=त्वयि विद्यमानाः। आशसः=आशंसनानि=आशाः पूर्वीः चित्=पूर्णा एव सन्ति। तथा त्वयि। ऊतयः=रक्षा अपि पूर्णाः सन्तीति हेतोः। तदर्थम्। त्वां हवन्ते=आह्वयन्ति। अतः। अर्यः=श्रेष्ठस्त्वम्। तिरश्चित्= गुप्तरूपेणापि। सवना=सवनानि। आगहि=आगच्छ। हे वसो=वासक ! हे शविष्ठ=महाबलाधिदेव ! मे=मम। हवम्=निवेदनम्। श्रुधि=शृणु ॥१२॥

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O budding scholars and sages, let the soma of hope and joy be distilled and poured for you. Fear not. This terror and destruction is going away. Self- destroyed, it is going away, vanishing of itself.