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तत्रो॒ अपि॒ प्राणी॑यत पू॒तक्र॑तायै॒ व्य॑क्ता । अश्वा॑ना॒मिन्न यू॒थ्या॑म् ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
tatro api prāṇīyata pūtakratāyai vyaktā | aśvānām in na yūthyām ||
पद पाठ
तत्रो॒ इति॑ । अपि॑ । प्र । अ॒नी॒य॒त॒ । पू॒तऽक्र॑तायै । विऽअ॑क्ता । अश्वा॑नाम् । इत् । न । यू॒थ्या॑म् ॥ ८.५६.४
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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:56» मन्त्र:4
| अष्टक:6» अध्याय:4» वर्ग:27» मन्त्र:4
| मण्डल:8» अनुवाक:6» मन्त्र:4
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
पूतक्रता के लिए भी व्यक्ता
पदार्थान्वयभाषाः - [१] (तत्र) = वहाँ इस मानवजीवन में (पूतक्रतायै) = पवित्र ज्ञान व कर्मोंवाली इस स्त्री के लिए (अपि) = भी (उ) = निश्चय से (व्यक्ता) = सब पदार्थों के प्रकाशवाली सब सत्य विद्याओं के प्रकाशवाली- यह वेदवाणी प्राणीयत प्राप्त कराई जाती है। [२] उसीप्रकार यह वेदवाणी पूतक्रता के लिए प्राप्त कराई जाती है (न) = जैसे (इत्) = निश्चय से (अश्वानाम् यूथ्याम्) = इन्द्रियाश्वों का समूह । स्त्री को भी कमेन्द्रियाँ व ज्ञानेन्द्रियाँ प्राप्त कराई जाती हैं। इसी प्रकार उसे वेदज्ञान भी दिया जाता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ:- पवित्र ज्ञान व कर्मोंवाली स्त्रियाँ भी इन्द्रियाश्वों के समूह की तरह इस वेदज्ञान को प्राप्त करती हैं। 'उन्हें वेद पढ़ने का अधिकार न हो' यह बात नहीं है।
डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - And therein too, for the sake of greater and nobler strength and efficiency, the dynamic leader infused exceptional collective strength and spirit as if of a regiment of horse.
