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श॒तं मे॑ गर्द॒भानां॑ श॒तमूर्णा॑वतीनाम् । श॒तं दा॒साँ अति॒ स्रज॑: ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

śatam me gardabhānāṁ śatam ūrṇāvatīnām | śataṁ dāsām̐ ati srajaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

श॒तम् । मे॒ । ग॒र्द॒भाना॑म् । श॒तम् । ऊर्णा॑ऽवतीनाम् । श॒तम् । दा॒सान् । अति॑ । स्रजः॑ ॥ ८.५६.३

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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:56» मन्त्र:3 | अष्टक:6» अध्याय:4» वर्ग:27» मन्त्र:3 | मण्डल:8» अनुवाक:6» मन्त्र:3


हरिशरण सिद्धान्तालंकार

गर्दभ + ऊर्णावती

पदार्थान्वयभाषाः - [१] गतमन्त्र में वृणत वेदज्ञान के द्वारा प्रभु (मे) = मेरे लिए (शतं) = शतवर्ष पर्यन्त ठीक रहनेवाली (गर्दभानां) = कार्यभार को गधे के समान उठानेवाली कर्मेन्द्रियों को तथा (शतं) = शतवर्ष पर्यन्त अपना कार्य ठीक से करनेवाली (ऊर्णावतीनाम्) = [ऊर्णु आच्छादने] हमें पापों से आच्छादित करनेवाली- बचानेवाली ज्ञानेन्द्रियों को (अतिस्त्रजः) = देते हैं। [२] इसप्रकार उत्तम कर्मेन्द्रियों व उत्तम ज्ञानेन्द्रियों को देकर प्रभु हमारे लिए (शतं) = शतवर्षपर्यन्त (दासान्) = [दसु उपक्षये] वासनाविनाशों को प्राप्त कराते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- वेदज्ञान के द्वारा प्रभु हमारी कर्मेन्द्रियों व ज्ञानेन्द्रियों को प्रशस्त बनाते हैं और वासनाओं का विनाश करते हैं।

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - He gives me a hundred mules, a hundred woolly sheep, and grants me a hundred permanent assistants and garlands of honour.