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दश॒ मह्यं॑ पौतक्र॒तः स॒हस्रा॒ दस्य॑वे॒ वृक॑: । नित्या॑द्रा॒यो अ॑मंहत ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

daśa mahyam pautakrataḥ sahasrā dasyave vṛkaḥ | nityād rāyo amaṁhata ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

दश॑ । मह्य॑म् । पौ॒त॒ऽक्र॒तः । स॒हस्रा॑ । दस्य॑वे । वृकः॑ । नित्या॑त् । रा॒यः । अ॒मं॒ह॒त॒ ॥ ८.५६.२

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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:56» मन्त्र:2 | अष्टक:6» अध्याय:4» वर्ग:27» मन्त्र:2 | मण्डल:8» अनुवाक:6» मन्त्र:2


हरिशरण सिद्धान्तालंकार

वेदज्ञान की महिमा

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (पौतक्रतः) = पवित्र ज्ञान व पवित्र कर्मोंवाला, (दस्यवे वृकः) = दास्यव वृत्तियों के लिए भेड़िये के समान वह प्रभु (मह्यं) = मेरे लिए (नित्यात्) = इस नित्य [सनातन] वेदज्ञान के द्वारा (सहस्राः) = आनन्दयुक्त (दश) = दस इन्द्रियों व प्राणों को (अमंहत) = देते हैं। [२] इस वेदज्ञान के द्वारा ही वे प्रभु (सहस्त्रा रायः) = आनन्द के साधक धनों को प्राप्त कराते हैं। इस धन के द्वारा हम भी पवित्र ज्ञान व पवित्र कर्मों को सिद्ध करते हुए 'पौतक्रत' बनते हैं। वेदज्ञान हमें भी 'दस्यवे वृक' बनाता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु वेदज्ञान द्वारा हमें प्रसन्न इन्द्रियों व आनन्दप्रद धनों को प्राप्त कराते हैं।

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - The heroic ruler, scourge of evil and the grabbers, doing good and blameless actions, gives me ten thousand gifts and grants from the wealth of his regular collections.