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प्रति॑ ते दस्यवे वृक॒ राधो॑ अद॒र्श्यह्र॑यम् । द्यौर्न प्र॑थि॒ना शव॑: ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
prati te dasyave vṛka rādho adarśy ahrayam | dyaur na prathinā śavaḥ ||
पद पाठ
प्रति॑ । ते॒ । द॒स्य॒वे॒ । वृ॒क॒ । राधः॑ । अ॒द॒र्शि॒ । अह्र॑यम् । द्यौः । न । प्र॒थि॒ना । शवः॑ ॥ ८.५६.१
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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:56» मन्त्र:1
| अष्टक:6» अध्याय:4» वर्ग:27» मन्त्र:1
| मण्डल:8» अनुवाक:6» मन्त्र:1
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
अह्रयं राधः, शवः
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (दस्यवे वृक) = दास्यव वृत्तियों के लिए वृक के समान दास्यववृत्तिरूप भेड़ों को समाप्त करनेवाले भेड़िये के समान प्रभो! (ते) = आपका (राधः) = ऐश्वर्य (प्रति अदर्शि) = प्रत्येक स्थान में दृष्टिगोचर होता है, जो (अह्रयम्) = अक्षीण हैं। आपका ऐश्वर्य कभी क्षीण नहीं होता । [२] आपका (शवः) = बल भी (प्रथिना) = विस्तार के दृष्टिकोण से (द्यौः न) = आकाश के समान है। प्रभु की शक्ति का प्रकाश सर्वत्र है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु का ऐश्वर्य अक्षीण है, शक्ति अनन्त है। उपासक के लिए भी प्रभु अक्षय धन व बल प्राप्त कराते हैं।
डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - O scourge of the evil, your power and generosity is blameless and admirable, and your power and glory, expansive as the light of heaven is seen shining through space.
