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श॒तं श्वे॒तास॑ उ॒क्षणो॑ दि॒वि तारो॒ न रो॑चन्ते । म॒ह्ना दिवं॒ न त॑स्तभुः ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
śataṁ śvetāsa ukṣaṇo divi tāro na rocante | mahnā divaṁ na tastabhuḥ ||
पद पाठ
श॒तम् । श्वे॒तासः॑ । उ॒क्षणः॑ । दि॒वि । तारः॑ । न । रो॒च॒न्ते॒ । म॒ह्ना । दिव॑म् । न । त॒स्त॒भुः॒ ॥ ८.५५.२
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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:55» मन्त्र:2
| अष्टक:6» अध्याय:4» वर्ग:26» मन्त्र:2
| मण्डल:8» अनुवाक:6» मन्त्र:2
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
शतं श्वेतासः उक्षणः
पदार्थान्वयभाषाः - [१] गतमन्त्र में वृणत इन्द्रशक्ति का उल्लेख करते हुए ही कहते हैं कि उस प्रभु की (मह्ना) = महिमा से (शतं) = सैकड़ों (श्वेतासः) = शुभ्र उज्ज्वल प्रकाश से देदीप्यमान (उक्षण:) = पृथ्वी पर जलसेचन के करानेवाले सूर्य (दिवि) = द्युलोक में (तारः न) = तारों के समान (रोचन्ते) = चमकते हैं। इस सूर्य के समान ब्रह्माण्ड में कितने ही सूर्य हैं। [२] ये सूर्य (दिवं न) = द्युलोक के समान सब लोकों को (तस्तभुः) = आकर्षण के द्वारा थामते हैं-इन लोकों का ये सूर्य ही धारण करते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- ब्रह्माण्ड में अनेक सूर्य हैं। ये सूर्य अपने चारों ओर के लोकों का धारण करते हैं।
डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Hundreds of brilliant acts of virile generosity shine like stars in the skies as if with your might and grandeur they hold up the heavens of light.
