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यदि॑न्द्र॒ राधो॒ अस्ति॑ ते॒ माघो॑नं मघवत्तम । तेन॑ नो बोधि सध॒माद्यो॑ वृ॒धे भगो॑ दा॒नाय॑ वृत्रहन् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

yad indra rādho asti te māghonam maghavattama | tena no bodhi sadhamādyo vṛdhe bhago dānāya vṛtrahan ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

यत् । इ॒न्द्र॒ । राधः॑ । अस्ति॑ । ते॒ । माघो॑नम् । म॒घ॒व॒त्ऽत॒म॒ । तेन॑ । नः॒ । बो॒धि॒ । स॒ध॒ऽमाद्यः॑ । वृ॒धे । भगः॑ । दा॒नाय॑ । वृ॒त्र॒ऽह॒न् ॥ ८.५४.५

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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:54» मन्त्र:5 | अष्टक:6» अध्याय:4» वर्ग:25» मन्त्र:1 | मण्डल:8» अनुवाक:6» मन्त्र:5


हरिशरण सिद्धान्तालंकार

माघोनं राधः

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (मघवत्तम) = अतिशयेन ऐश्वर्यशालिन् प्रभो ! (यत्) = जो (ते) = आपका (माघोनं) = हमें [मघ-मख] यज्ञशील बनानेवाला (राध:) = ऐश्वर्य (अस्ति) = है, (तेन) = उस ऐश्वर्य से (नः बोधि) = हमें जानिये, अर्थात् उस ऐश्वर्य को हमें प्राप्त कराइये। [२] हे (वृत्रहन्) = वासनाओं को विनष्ट करनेवाले प्रभो! आप (सधमाद्यः) = हमारे साथ होते हुए हमें आनन्दित करनेवाले हैं और (वृधे) = हमारी वृद्धि के लिए होते हैं। (भगः) = ऐश्वर्य के पुञ्ज आप (दानाय) = हमें सब ऐश्वर्यों के देने के लिए होते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ-प्रभु से दिया गया धन हमें यज्ञशील बनाता है। हमारे साथ होते हुए प्रभु हमें आनन्दित करते हैं। हमारी वासनाओं को विनष्ट करते हुए हमारा वर्धन करते हैं।

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Indra, lord of highest glory among the powerful, your munificence and power of accomplishment under control of your majesty is great. By that power of majesty, O lord of honour and liberal grandeur, friend of the house of yajnic celebration, destroyer of evil and want, enlighten us for advancement and inspire us with the spirit of charity.