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आ नो॒ विश्वे॑ स॒जोष॑सो॒ देवा॑सो॒ गन्त॒नोप॑ नः । वस॑वो रु॒द्रा अव॑से न॒ आ ग॑मञ्छृ॒ण्वन्तु॑ म॒रुतो॒ हव॑म् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

ā no viśve sajoṣaso devāso gantanopa naḥ | vasavo rudrā avase na ā gamañ chṛṇvantu maruto havam ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

आ । नः॒ । विश्वे॑ । स॒ऽजोष॑सः॑ । देवा॑सः । गन्त॑न । उप॑ । नः॒ । वस॑वः । रु॒द्राः । अव॑से । नः॒ । आ । ग॒म॒न् । शृ॒ण्वन्तु॑ । म॒रुतः॑ । हव॑म् ॥ ८.५४.३

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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:54» मन्त्र:3 | अष्टक:6» अध्याय:4» वर्ग:24» मन्त्र:3 | मण्डल:8» अनुवाक:6» मन्त्र:3


हरिशरण सिद्धान्तालंकार

वसवः, रुद्राः, मरुतः

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (नः) = हमारे प्रति (सजोषसः) = समानरूप से प्रीतिवाले होते हुए (विश्वे) = सब (देवासः) = देव (आ) = सब ओर से (नः उपगन्तन) = हमारे समीप प्राप्त हों। हम सदा देवों के संग को प्राप्त करें। [२] (वसवः) = अपने निवास को उत्तम बनानेवाले, (रुद्रः) = सब रोगों को दूर भगानेवाले विद्वान् (नः अवसे) = हमारे रक्षण के लिए (आगमन्) = हमें प्राप्त हों। (मरुतः) = प्राणसाधना में प्रवृत्त साधक लोग (हवम् शृण्वन्तु) = हमारी पुकार को सुनें। इनके सम्पर्क में हम भी 'वसु-रुद्र व मरुत्' बन पाएँ ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सब दिव्यगुण हमें प्राप्त हों। हम वसु, रुद्र व मरुतों के सम्पर्क में आकर उत्तम निवासवाले, नीरोग व प्राणशक्तिसम्पन्न बनें।

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Let all friends and divinities of the world come to us and bless. Let all Vasus such as earth, all Rudras such as pranic energies, come and bless us for our protection and sustenance, and may the Maruts, vibrations of divinity and high priests of yajna, listen to our call and come with gifts of grace.