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क॒दा च॒न प्र यु॑च्छस्यु॒भे नि पा॑सि॒ जन्म॑नी । तुरी॑यादित्य॒ हव॑नं त इन्द्रि॒यमा त॑स्थाव॒मृतं॑ दि॒वि ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

kadā cana pra yucchasy ubhe ni pāsi janmanī | turīyāditya havanaṁ ta indriyam ā tasthāv amṛtaṁ divi ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

क॒दा । च॒न । प्र । यु॒च्छ॒सि॒ । उ॒भे इति॑ । नि । पा॒सि॒ । जन्म॑नी॒ इति॑ । तुरी॑य । आ॒दि॒त्य॒ । हव॑नम् । ते॒ । इ॒न्द्रि॒यम् । आ । त॒स्थौ॒ । अ॒मृत॑म् । दि॒वि ॥ ८.५२.७

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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:52» मन्त्र:7 | अष्टक:6» अध्याय:4» वर्ग:21» मन्त्र:2 | मण्डल:8» अनुवाक:6» मन्त्र:7


हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'तुरीय आदित्य' प्रभु

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे प्रभो ! आप (कदा च) = कभी भी (न प्रयुच्छसि) = प्रमाद नहीं करते हो। (उभे) = दोनों (जन्मनी) = जन्मों को - इहलोक व परलोक को (निपासि) = निश्चय से रक्षित करते हो। [२] हे (तुरीय) = समाधिजन्य तुरीयावस्था से प्राप्त होने योग्य ! (आदित्य) = सूर्यवत् देदीप्यमान प्रभो ! [आदित्यवर्णम्] (ते हवनम्) = आपका पुकारना (इन्द्रियं) = वीर्य व बल है, अर्थात् आपकी आराधना से शक्ति प्राप्त होती है। आपके (दिवि) = ज्ञान के प्रकाश में (अमृतं) = नीरोगता व अमरता (आतस्थौ) = स्थित है। आपसे दिया जानेवाला यह ज्ञान का प्रकाश हमारे लिए अमृतत्व को देनेवाला है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु प्रमादरहित होकर हमारे इहलोक व परलोक का रक्षण करते हैं। प्रभु की आराधना हमें शक्ति देती है। प्रभु से दिये गये ज्ञान के प्रकाश में अमृतत्व निहित हैं।

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Eternal lord immanent and transcendent, when is it you neglect your devotee? Never. You bless both lives, this here and the next hereafter. Indeed the very call on you in prayer means honour and glory immortal which abides in heaven.