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देवता: इन्द्र: ऋषि: आयुः काण्वः छन्द: बृहती स्वर: मध्यमः
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यो नो॑ दा॒ता स न॑: पि॒ता म॒हाँ उ॒ग्र ई॑शान॒कृत् । अया॑मन्नु॒ग्रो म॒घवा॑ पुरू॒वसु॒र्गोरश्व॑स्य॒ प्र दा॑तु नः ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

yo no dātā sa naḥ pitā mahām̐ ugra īśānakṛt | ayāmann ugro maghavā purūvasur gor aśvasya pra dātu naḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

यः । नः॒ । दा॒ता । सः । नः॒ । पि॒ता । म॒हान् । उ॒ग्रः । ई॒शा॒न॒ऽकृत् । अया॑मन् । उ॒ग्रः । म॒घऽवा॑ । पु॒रु॒ऽवसुः॑ । गोः । अश्व॑स्य । प्र । दा॒तु॒ । नः॒ ॥ ८.५२.५

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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:52» मन्त्र:5 | अष्टक:6» अध्याय:4» वर्ग:20» मन्त्र:5 | मण्डल:8» अनुवाक:6» मन्त्र:5


हरिशरण सिद्धान्तालंकार

गोः अश्वस्य प्रदातु नः

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (यः) = जो (नः) = हमारे लिए (दाता) = सबकुछ देनेवाले हैं, (सः) = वे (नः) = हमारे (पिता) = पिता हैं। (महान्) = पूजनीय हैं। (उग्र:) = तेजस्वी हैं। (ईशानकृत्)= ऐश्वर्य को करनेवाले हैं। [२] वे प्रभु (उग्र:) = तेजस्वी व (मघवा) = ऐश्वर्यशाली हैं। वे हमारे लिए (अयामन्) = इन धनों को देते हैं। वे (पुरूवसुः) = पालक व पूरक वसुओं के देनेवाले प्रभु (नः) = हमारे लिए (गोः) = ज्ञानेन्द्रियों व (अश्वस्य) = कर्मेन्द्रियों को (प्रदातु) = देनेवाले हों।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- - प्रभु सर्वप्रद हैं। हमारे लिए वे ज्ञानेन्द्रियों व कर्मेन्द्रियों को तथा पालक व पूरक धनों को देनेवाले हों।

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - He who is the giver of every thing for us, he is our father, great, illustrious, ruler and creator of ruling glory, unretreating, blazing brave, glorious, universal shelter and treasure home of wealth. May he, we pray, give us the wealth of lands and cows, knowledge and culture, and horses, achievements, success and constant progress.