वांछित मन्त्र चुनें
333 बार पढ़ा गया

अ॒स्माक॑म॒द्य वा॑म॒यं स्तोमो॒ वाहि॑ष्ठो॒ अन्त॑मः । यु॒वाभ्यां॑ भूत्वश्विना ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

asmākam adya vām ayaṁ stomo vāhiṣṭho antamaḥ | yuvābhyām bhūtv aśvinā ||

पद पाठ

अस्माक॑म् । अ॒द्य । वा॒म् । अ॒यम् । स्तोमः॑ । वाहि॑ष्ठः । अन्त॑मः । यु॒वाभ्या॑म् । भू॒तु॒ । अ॒श्वि॒ना॒ ॥ ८.५.१८

333 बार पढ़ा गया
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:5» मन्त्र:18 | अष्टक:5» अध्याय:8» वर्ग:4» मन्त्र:3 | मण्डल:8» अनुवाक:1» मन्त्र:18


शिव शंकर शर्मा

राजवर्ग को अपनी-२ प्रार्थना सुनावे, यह इससे दिखलाते हैं।

पदार्थान्वयभाषाः - (अश्विना) हे अश्वादिबलयुक्त राजा तथा सभाध्यक्ष ! (अद्य) आज (अयम्) यह (अस्माकम्+स्तोमः) हम लोगों की स्तुति प्रार्थना (वाम्) आप दोनों को (वाहिष्ठः) अतिशय प्रसन्न करनेवाली (युवाभ्याम्) और आपके (अन्तमः+भूतु) अतिशय समीपवर्ती हो ॥१८॥
भावार्थभाषाः - सत्य और हृदयग्राही स्तुति प्रार्थना राजवर्ग को सुनावें ॥१८॥

आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (अश्विना) हे ओजस्विन् ! (अद्य) आज (अस्माकं) हमारा (अयं, वां, स्तोमः) यह आपके लिये किया गया स्तोत्र (युवाभ्यां) आपको (वाहिष्ठः) अवश्य प्राप्त करानेवाला और (अन्तमः) समीप में होनेवाला (भूतु) हो ॥१८॥
भावार्थभाषाः - हे ज्ञानयोगिन् तथा कर्मयोगिन् ! आज हम लोग जिस स्तोत्र द्वारा आपकी स्तुति करते हैं, वह हमारे लिये सफलीभूत हो अर्थात् हम लोग आपके शुभाचरणों का अनुकरण करके पराक्रमी, उद्योगी तथा विद्वान् होकर आपके समीपवर्ती हों ॥१८॥

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

वाहिष्ठः [स्तोमः]

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (अश्विना) = प्राणापानो! (अद्य) = आज (अस्माकम्) = हमारा (अयम्) = यह (याम्) = आपके लिये किया गया (स्तोमः) = स्तुति समूह (युवाभ्यां अन्तमः भूतु) = आपके लिये अन्तिकतम हो, अत्यन्त प्रिय हो । अर्थात् हमें यह आपकी स्तुति आपके प्रति रुचिवाला बनाये, हम प्राणसाधना की प्रवृत्तिवाले हों। [२] यह स्तोम (वाहिष्ठः) = हमें अधिक-से-अधिक लक्ष्य के समीप पहुँचानेवाला हो। वस्तुतः प्राणसाधना ही चित्तवृत्ति की एकाग्रता का साधन बनकर हमें प्रभु-दर्शन कराती है। यह प्रभु-दर्शन ही अन्तिम लक्ष्य है, यहाँ हमें यह प्राणों का स्तवन पहुँचानेवाला होता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम प्राणापान का स्तवन करते हुए प्राणसाधना में प्रवृत्त हों। यह साधना ही हमें लक्ष्य- स्थान पर पहुँचायेगी।

शिव शंकर शर्मा

राजवर्गं स्वस्वप्रार्थनां श्रावयेदिति दर्शयति।

पदार्थान्वयभाषाः - हे अश्विना=अश्विनौ राजानौ। अद्यास्मिन् दिवसे। अयमस्माकं स्तोमः=प्रार्थना। वाम्=युवयोः। वाहिष्ठः=वाहयितृतमः प्रसादयितृतमः सन्। युवाभ्यां युवयोरन्तमोऽन्तिकतमोऽतिशयसमीपवर्ती। भूतु=भवतु ॥१८॥

आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (अश्विना) हे ओजस्विनौ ! (अद्य) इदानीं (अस्माकं) अस्मदीयं (अयं) एषः (वां, स्तोमः) युवयोः स्तोत्रं (युवाभ्यां) त्वदर्थं (वाहिष्ठः) अतिशयेन प्रापकं (अन्तमः) अन्तिकतमं च (भूतु) भवतु ॥१८॥

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Ashvins, may this song of our invocation, adoration and yajnic prayer be most touching for you at heart and impel you to respond and come.