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देवता: वायु: ऋषि: वशोऽश्व्यः छन्द: बृहती स्वर: मध्यमः
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आ नो॑ वायो म॒हे तने॑ या॒हि म॒खाय॒ पाज॑से । व॒यं हि ते॑ चकृ॒मा भूरि॑ दा॒वने॑ स॒द्यश्चि॒न्महि॑ दा॒वने॑ ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

ā no vāyo mahe tane yāhi makhāya pājase | vayaṁ hi te cakṛmā bhūri dāvane sadyaś cin mahi dāvane ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

आ । नः॒ । वा॒यो॒ इति॑ । म॒हे । तने॑ । या॒हि । म॒खाय॑ । पाज॑से । व॒यम् । हि । ते॒ । च॒कृ॒म । भूरि॑ । दा॒वने॑ । स॒द्यः । चि॒त् । महि॑ । दा॒वने॑ ॥ ८.४६.२५

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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:46» मन्त्र:25 | अष्टक:6» अध्याय:4» वर्ग:5» मन्त्र:5 | मण्डल:8» अनुवाक:6» मन्त्र:25


शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - उस ईश्वर की कृपा से मैं उपासक (अश्व्यस्य+षष्टिं+सहस्रा) ६०००० साठ सहस्र घोड़ों को (असनम्) रखता हूँ, (अयुता) अन्यान्य पशु मेरे निकट कई एक अयुत हैं, (उष्ट्राणाम्+विंशतिम्+शता) बीस शत ऊँट मेरे पास हैं, (श्यावीनाम्+दश+शता) दश शत घोड़ियाँ मेरे निकट हैं। (त्र्यरुषीणाम्) तीन स्थानों में श्वेत चिह्नवाली (गवाम्) गाएँ (दश+सहस्रा) दश सहस्र हैं ॥२२॥
भावार्थभाषाः - जैसे विवाह के मन्त्र वर-वधू ही पढ़ते हैं, सबके लिये नहीं हैं, इसी प्रकार जिन राजा महाराजा आदिकों के निकट इतने पशु हों, वे इन मन्त्रों को उच्चारण कर ईश्वर की स्तुति प्रार्थना करें। उसको धन्यवाद दें ॥२२॥

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

तने, मखाय, पाजसे

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (वायो) = गति के द्वारा सब बुराइयों का विध्वंस करनेवाले प्रभो ! (आयाहि) = आप आइये। (न:) = हमारे (महे) = महान् (तने) = शक्ति के विस्तार के लिए आप हमें प्राप्त होइये । (मखाय) = यज्ञों के लिए तथा (पाजसे) = शक्ति के लिए आप हमें प्राप्त होइए। [२] (वयं) = हम भूरिदावने खूब ही देनेवाले (ते) = आपके लिए (हि) = निश्चय से (चकृमा) = स्तुति को करें। (महिदावने) = महान् दाता के लिए (सद्यः चित्) = शीघ्र ही स्तुति को करें।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभुस्तवन द्वारा हम प्रभु के सान्निध्य को प्राप्त करें। यह सान्निध्य हमारी शक्तियों के विस्तार के लिए यज्ञ की प्रवृत्ति के लिए तथा बल के लिए हो। उस महान् दाता प्रभु का स्मरण करते हुए हम भी दानशील बनें।

शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - तस्येश्वरस्य कृपया। अहमुपासकः। अश्व्यस्य=अश्वसम्बन्धिनः। षष्टिं। सहस्रा=सहस्राणि। अयुता=अयुतानि च। असनम्=प्राप्नोति। पुनः। उष्ट्राणाम्। विंशतिम्। शता=शतानि। असनम्। श्यावीनां= श्याववर्णानां=वडवानाम्। दश शता=शतानि। असनम्=यरुषीणाम्=त्रीण्यारोचमानानि शुभ्राणि यासां तादृशीनां गवाम्। दश सहस्रा=सहस्राणि चासनम् ॥२२॥

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O Vayu, lord of mighty motion, come for the great expansion of the speed and power of our yajna. Lord of high generosity, we adore you always and glorify you as a great, liberal and universal ultimate giver.