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स॒मि॒धा॒न उ॑ सन्त्य॒ शुक्र॑शोच इ॒हा व॑ह । चि॒कि॒त्वान्दैव्यं॒ जन॑म् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

samidhāna u santya śukraśoca ihā vaha | cikitvān daivyaṁ janam ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

स॒म्ऽइ॒धा॒नः । ऊँ॒ इति॑ । स॒न्त्य॒ । शुक्र॑ऽशोचे । इ॒ह । आ । व॒ह॒ । चि॒कि॒त्वान् । दैव्य॑म् । जन॑म् ॥ ८.४४.९

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:44» मन्त्र:9 | अष्टक:6» अध्याय:3» वर्ग:37» मन्त्र:4 | मण्डल:8» अनुवाक:6» मन्त्र:9


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शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - मैं उपासक (अग्निम्+ईळे) अग्निवाच्य परमात्मा की स्तुति करता हूँ, क्योंकि (सः+उ) वही (श्रवत्) मेरे स्तोत्र और अभीष्टों को सुनता है, जो (मन्द्रम्) आनन्दप्रद (होतारम्) दाता (ऋत्विजम्) ऋतु-२ में सर्व पदार्थों को इकट्ठा करनेवाला (चित्रभानुम्) आश्चर्य्य तेजोयुक्त और (विभावसुम्) सबको प्रकाशित करनेवाला और आदर देनेवाला है। वही एक देव उपास्य है ॥६॥
भावार्थभाषाः - हे मनुष्यों ! उसी की उपासना करो, जो तुम्हारी बातों को सुनता और पूर्ण करता है ॥६॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'संभजनीय व उज्ज्वल ज्ञानदीप्तिवाले' प्रभु

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (सन्त्य) = संभजनीय, (शुक्रशोचे) = देदीप्यमान ज्ञानदीप्तिवाले प्रभो ! (समिधानः उ) = हृदयदेश में समिध्यमान होते हुए ही (चिकित्वान्) = ज्ञानी आप (इह) = इस जीवनयज्ञ में (दैव्यं जनं) = देव की ओर जा रहे मनुष्य को [प्रभु के उपासक को] (आवह) = प्राप्त कराइए। [२] प्रभु की कृपा से हमारा सम्पर्क दिव्य प्रवृत्तिवाले लोगों से हो। इनके सम्पर्क में हम प्रभु के संभजनवाले, उज्ज्वल ज्ञानदीप्तिवाले बनेंगे और इस प्रकार यह जीवनयज्ञ बड़ी सुन्दरता से पूर्ण होगा।
भावार्थभाषाः - भावार्थ:- सत्संग से हम प्रभु के उपासक व उज्ज्वल ज्ञानदीप्तिवाले बनें। इस प्रकार इस जीवनयज्ञ को पवित्रता से पूर्ण करें।
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शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - अहमुपासकः। अग्निमीशमीळे=स्तौमि। यतः। स उ=स एव मम स्तोत्राणि। श्रवत्=शृणोति। कीदृशमग्निम्। मन्द्रम्=मादयितारम् आनन्दयितारम्। होतारम्=दातारम्। ऋत्विजम्=ऋतौ-२ यजमानं=संगतिकारकम्। चित्रभानुम्=आश्चर्य्यतेजस्कम्। पुनः। विभावसुम् विभावयितारं विभासयितारं वा ॥६॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Excellent and benevolent Agni, bright and gracious of pure and powerful flame, all knowing and illuminating, pray bring here on the vedi pious people of divine generosity and intellectual brilliance.