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स त्वं विप्रा॑य दा॒शुषे॑ र॒यिं दे॑हि सह॒स्रिण॑म् । अग्ने॑ वी॒रव॑ती॒मिष॑म् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

sa tvaṁ viprāya dāśuṣe rayiṁ dehi sahasriṇam | agne vīravatīm iṣam ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

सः । त्वम् । विप्रा॑य । दा॒शुषे॑ । र॒यिम् । दे॒हि॒ । स॒ह॒स्रिण॑म् । अग्ने॑ । वी॒रऽव॑तीम् । इष॑म् ॥ ८.४३.१५

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:43» मन्त्र:15 | अष्टक:6» अध्याय:3» वर्ग:31» मन्त्र:5 | मण्डल:8» अनुवाक:6» मन्त्र:15


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शिव शंकर शर्मा

पुनः परमात्मा ही उपासनीय है, यह इस ऋचा से दिखलाते हैं।

पदार्थान्वयभाषाः - (उत) और (होतः) हे सर्वप्राणप्रद हे परमदाता (वरेण्यक्रतो) हे श्रेष्ठकर्मन् (अग्ने) सर्वव्यापिन् देव ! (वयम्) हम उपासक (त्वा) आपको (नमसा) नमस्कार और (समिद्भिः) सम्यक् दीप्त शुद्ध इन्द्रियों से पूज कर (ईमहे) माँगते हैं ॥१२॥
भावार्थभाषाः - कामनाओं की पूर्ति के लिये अन्यान्य देवों से याचना लोग करते हैं। इस ऋचा द्वारा उसका निषेध कर केवल ईश्वर से ही याचना करनी चाहिये, यह शिक्षा देते हैं ॥१२॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

सहस्रिणम् रयिम्

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (अग्ने) = अग्रणी प्रभो ! (स त्वं) = वे आप (विप्राय) = विशेषरूप से अपना पूरण करनेवाले (दाशुषे) = दाश्वान्-दानशील व आत्मसमर्पण करनेवाले पुरुष के लिए (सहस्रिणं) = सहस्रों की संख्यावाले बहुत अधिक (रयिं) = ऐश्वर्य को (देहि) = दीजिए। [२] हे अग्ने ! आप (वीरवतीम्) = [वीर=प्राण] प्राणोंवाली (इषं) = प्रेरणा को प्राप्त कराइए। प्रेरणा को प्राप्त कराइए और प्रेरणा के साथ उस प्राणशक्ति को भी प्राप्त कराइए जिससे कि उस प्रेरणा को हम कार्यान्वित कर पाएँ ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हे प्रभो ! हम ज्ञानी व आत्मसमर्पण करनेवाले बनें। आप हमारे लिए ऐश्वर्य, प्राणशक्ति व प्रेरणा को प्राप्त कराइए।
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शिव शंकर शर्मा

पुनः परमात्मैवोपासनीय इत्यनया दर्शयति।

पदार्थान्वयभाषाः - उत=अपि च। हे होतः=सर्वेषां प्राणप्रद हे परमदातः ! हे वरेण्यक्रतो=वरेण्याः श्रेष्ठा वरणीयाश्च क्रतवः कर्माणि जगद्रचनारूपाणि यस्य। हे सर्वश्रेष्ठकर्मन् हे अग्ने ! वयमुपासकाः। त्वाम्। नमसा=नमस्कारेण। समिद्भिः=सम्यग्दीप्तैः सर्वैरिन्द्रियैश्च। सम्पूज्य। ईमहे=याचामहे ॥१२॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - So generous and responsive as you are, Agni, give a thousandfold wealth, honour and excellence for the vibrant scholar and generous yajaka, give him life sustaining food and energy and generations of brave progeny.