वांछित मन्त्र चुनें
423 बार पढ़ा गया

आ त्वा॒ कण्वा॑ इ॒हाव॑से॒ हव॑न्ते॒ वाज॑सातये । दि॒वो अ॒मुष्य॒ शास॑तो॒ दिवं॑ य॒य दि॑वावसो ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

ā tvā kaṇvā ihāvase havante vājasātaye | divo amuṣya śāsato divaṁ yaya divāvaso ||

पद पाठ

आ । त्वा॒ । कण्वाः॑ । इ॒ह । अव॑से । हव॑न्ते । वाज॑ऽसातये । दि॒वः । अ॒मुष्य॑ । शास॑तः । दिव॑म् । य॒य । दि॒वा॒व॒सो॒ इति॑ दिवाऽवसो ॥ ८.३४.४

423 बार पढ़ा गया
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:34» मन्त्र:4 | अष्टक:6» अध्याय:3» वर्ग:11» मन्त्र:4 | मण्डल:8» अनुवाक:5» मन्त्र:4


हरिशरण सिद्धान्तालंकार

अवसे वाजसातये

पदार्थान्वयभाषाः - (१) हे प्रभो ! गत मन्त्र के अनुसार शासन में चलते हुए (कण्वा) = मेधावी पुरुष (त्वा) = आपको (इह) = इस जीवन में (अवसे) = रक्षण के लिये तथा (वाजसातये) = शक्ति की प्राप्ति के लिये (आहवन्ते) = पुकारते हैं। प्रभु की आराधना ही हमें वासनाओं के आक्रमण से बचाती है और शक्ति को प्राप्त कराती है। (२) हे ज्ञानधन जीव ! तू उस प्रकाशमय शासक के प्रकाश को प्राप्त कर ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - मेधावी पुरुष रक्षण के लिये व शक्ति की प्राप्ति के लिये प्रभु को पुकारते हैं। ये ज्ञानधन पुरुष प्रभु के प्रकाश को पाने के लिये यत्नशील होते हैं।

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - The sages call you here for the art and science of defence and protection and for the victories of peace and progress. And from the light and wisdom of the enlightening sages, O lover and ruler of the light of day, rise to the light and heaven of your own imagination.