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ते न॑स्त्राध्वं॒ ते॑ऽवत॒ त उ॑ नो॒ अधि॑ वोचत । मा न॑: प॒थः पित्र्या॑न्मान॒वादधि॑ दू॒रं नै॑ष्ट परा॒वत॑: ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

te nas trādhvaṁ te vata ta u no adhi vocata | mā naḥ pathaḥ pitryān mānavād adhi dūraṁ naiṣṭa parāvataḥ ||

पद पाठ

ते । नः॒ । त्रा॒ध्व॒म् । ते॒ । अ॒व॒त॒ । ते । ऊँ॒ इति॑ । नः॒ । अधि॑ । वो॒च॒त॒ । मा । नः॒ । प॒थः । पित्र्या॑त् । मा॒न॒वात् । अधि॑ । दू॒रम् । नै॒ष्ट॒ । प॒रा॒ऽवतः॑ ॥ ८.३०.३

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:30» मन्त्र:3 | अष्टक:6» अध्याय:2» वर्ग:37» मन्त्र:3 | मण्डल:8» अनुवाक:4» मन्त्र:3


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

मानव मार्ग से दूर न होना

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (ते) = वे दिव्य गुणो ! (नः) = हमें (त्राध्वम्) = रोग आदि के आक्रमण से बचाओ । (ते) = वे आप हमें (अवत) = काम-क्रोध-लोभ का शिकार होने से रक्षित करो । (ते) = वे आप (उ) = निश्चय से (नः) = हमें (अधिवोचत) = आधिक्येन ज्ञान का उपदेश करनेवाले होवो। [२] इस प्रकार ज्ञान देते हुए आप (नः) = हमें (परावतः) = सुदूर काल से चले आये (पित्र्यात्) = परम पिता प्रभु से प्राप्त मानवात् मानव, मनुष्योचित (पथः अधि) = मार्ग से दूर (मा नैष्ट) = दूर न ले जाइये। दिव्य गुणों का ध्यान करते हुए हम मानवोचित मार्ग से ही गति करनेवाले हों।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- दिव्य गुणों का धारण हमें नीरोग व क्राम-क्रोध से अनाक्रान्त जीवनवाला बनाये। ये हमें ज्ञान की ओर ले चलें और मानवोचित मार्ग से दूर न ले जायें।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Such as you are, pray save us, protect and promote us, speak to us and enlighten us. Let us not stray out far from the right path of our ancestors or the right path of humanity.