वांछित मन्त्र चुनें
437 बार पढ़ा गया

योनि॒मेक॒ आ स॑साद॒ द्योत॑नो॒ऽन्तर्दे॒वेषु॒ मेधि॑रः ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

yonim eka ā sasāda dyotano ntar deveṣu medhiraḥ ||

पद पाठ

योनि॑म् । एकः॑ । आ । स॒सा॒द॒ । द्योत॑नः । अ॒न्तः । दे॒वेषु॑ । मेधि॑रः ॥ ८.२९.२

437 बार पढ़ा गया
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:29» मन्त्र:2 | अष्टक:6» अध्याय:2» वर्ग:36» मन्त्र:2 | मण्डल:8» अनुवाक:4» मन्त्र:2


शिव शंकर शर्मा

चक्षुदेव को दिखलाते हैं।

पदार्थान्वयभाषाः - (देवेषु) इन्द्रियों के (अन्तः) मध्य (द्योतनः) स्वतेज से प्रकाशमान और (मेधिरः) बुद्धिप्रद (एकः) एक नयनरूप देव (योनिम्) प्रधानस्थान (आससाद) पाए हुए हैं ॥२॥
भावार्थभाषाः - शरीर में नयन देव का प्रधान आसन है। प्रथम मनुष्य की बुद्धि इससे बढ़ती है, क्योंकि इससे देख-देखकर शिशु में जिज्ञासा शक्ति बढ़ती जाती है ॥२॥

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

द्योतन:- मेधिरः [अग्निः]

पदार्थान्वयभाषाः - [१] वह (एकः) = अद्वितीय प्रभु (योनिम्) = मूल कारण प्रकृति को (आससाद) = अध्यक्षरूपेण अधिष्ठित करता है। उस प्रभु से अधिष्ठित प्रकृति ही तो सब लोक-लोकान्तरों को प्रसूत करती है । [२] (देवेषु अन्तः) = सब सूर्यादि देवों में (द्योतनः) = दीप्ति को देनेवाला है, तथा [देवेषु अन्तः = ] सब विद्वानों में (मेधिरः) = मेधा बुद्धि को यह देनेवाला है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- वह अद्वितीय प्रभु प्रकृति का अधिष्ठाता है, वह हमें सुबुद्धि प्रदान करे।

शिव शंकर शर्मा

चक्षुर्देवं दर्शयति।

पदार्थान्वयभाषाः - देवेषु=देवानामिन्द्रियाणाम्। अन्तर्मध्ये। द्योतनः=प्रकाशमानः। मेधिरः=मेधावी=मेधाप्रदो=बुद्धिदः। एकश्चक्षुर्देवः। योनिम्=प्रधानस्थानम्। आससाद=प्राप्नोति ॥२॥

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Another, seated in its own place, wise and illuminant is venerable among the divinities. (This divinity is interpreted as Agni, the eye, and truth.)