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ते नो॑ गो॒पा अ॑पा॒च्यास्त उद॒क्त इ॒त्था न्य॑क् । पु॒रस्ता॒त्सर्व॑या वि॒शा ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
te no gopā apācyās ta udak ta itthā nyak | purastāt sarvayā viśā ||
पद पाठ
ते । नः॒ । गो॒पाः । अ॒पा॒च्याः । ते । उद॑क् । ते । इ॒त्था । न्य॑क् । पु॒रस्ता॑त् । सर्व॑या । वि॒शा ॥ ८.२८.३
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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:28» मन्त्र:3
| अष्टक:6» अध्याय:2» वर्ग:35» मन्त्र:3
| मण्डल:8» अनुवाक:4» मन्त्र:3
शिव शंकर शर्मा
वही प्रसङ्ग आ रहा है।
पदार्थान्वयभाषाः - (ते) वे वरुण=क्षत्र, मित्र=ब्रह्म, अर्य्यमा=वैश्य (सर्वया+विशा) सर्व प्रजाओं के साथ (अपाच्याः) पश्चिम दिशा से (नः) हमारे रक्षक होवें (ते) वे ही (उदक्तः) उत्तर दिशा से हमारे रक्षक होवें। (इत्था) इस प्रकार दक्षिण दिशा से ऊर्ध्व दिशा से भी हमें पालें। पुनः। (न्यक्) नीची दिशा से और (पुरस्तात्) पूर्व दिशा से हमारे पालक होवें ॥३॥
भावार्थभाषाः - मनुष्यदेव जो ब्राह्मणादिक हैं, वे हमारी सदा सब ओर रक्षा करें, अथवा वे इन्द्रियगण हमारी रक्षा करें, यह भाव ग्रहण करना चाहिये ॥३॥
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
देवों द्वारा सर्वतोरक्षण
पदार्थान्वयभाषाः - [१] (ते) = वे सब देव (अपाच्याः) = प्रतीची [पश्चिम] दिशा से (नः गोपाः) = हमारे रक्षक हों। (उदक्तः) = उत्तर दिशा से भी (ते) = वे हमारे रक्षक हों । (इत्था) = इसी प्रकार ऊर्ध्वा व दक्षिणा दिक् से भी वे हमारे रक्षक हों। [२] (न्यक्) = नीचे, अर्थात् नीची दिशा में स्थित ये अधःस्थ देव भी हमारा रक्षण करें। ये देव (सर्वया विशा) = सम्पूर्ण प्रजा के साथ (पुरस्तात्) = पूर्व दिशा से हमारा रक्षण करें।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- दिव्यभाव सब दिशाओं से हमारा रक्षण करनेवाले हों।
शिव शंकर शर्मा
तदेवानुवर्तते।
पदार्थान्वयभाषाः - ते=पूर्वोक्ता वरुणादयो मनुष्यदेवाः। सर्वया+विशा=सर्वाभिः प्रजाभिः सह। अपाच्या=अपाची=प्रतीची=पश्चिमा दिग्। तस्या अपाच्याः प्रतीच्या दिशः। नोऽस्माकम्। गोपाः=रक्षकाः भवन्तु। ते एव। उदक्तः=उदीच्या दिशः। रक्षका भवन्तु। इत्था=अनेन प्रकारेण। दक्षिणादिदिशामपि रक्षका भवन्तु। एवम्। न्यक्=नीच्या दिशः। पुरस्तात्=प्राच्या दिशश्च। ते देवा गोपा भवन्तु ॥३॥
डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Be they our protectors with all their vital powers from the west, north, south, east, above and below.
