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ते नो॑ ना॒वमु॑रुष्यत॒ दिवा॒ नक्तं॑ सुदानवः । अरि॑ष्यन्तो॒ नि पा॒युभि॑: सचेमहि ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

te no nāvam uruṣyata divā naktaṁ sudānavaḥ | ariṣyanto ni pāyubhiḥ sacemahi ||

पद पाठ

ते । नः॒ । ना॒वम् । उ॒रु॒ष्य॒त॒ । दिवा॑ । नक्त॑म् । सु॒ऽदा॒न॒वः॒ । अरि॑ष्यन्तः । नि । पा॒युऽभिः॑ । स॒चे॒म॒हि॒ ॥ ८.२५.११

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:25» मन्त्र:11 | अष्टक:6» अध्याय:2» वर्ग:23» मन्त्र:1 | मण्डल:8» अनुवाक:4» मन्त्र:11


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शिव शंकर शर्मा

पुनः उसी अर्थ को दिखलाते हैं।

पदार्थान्वयभाषाः - (सुदानवः) हे अपनी रक्षा से सुन्दर दान देनेवाले सेनानायको ! (ते) वे आप सब (नः+नावम्) हमारे व्यापारी जहाजों को (दिवा) दिन में (नक्तम्) रात्रि में (उरुष्यत) पालिये और (पायुभिः) आप रक्षकों के साथ हम सब (अरिष्यन्तः) हिंसित न होकर अर्थात् अच्छे प्रकार पालित होकर (निसचेमहि) अपने-२ काम में सदा लगे हुए रहें ॥११॥
भावार्थभाषाः - जो राज्य की रक्षा में नियुक्त हों, वे सचिन्त होकर सब पदार्थों के ऊपर ध्यान रक्खें, जिससे प्रजाएँ सुखी रहें ॥११॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

शरीररूप नाव का रक्षण

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (मरुतो) = प्राणो ! (सुदानवः) = सम्यक् वासनाओं को खण्डित करनेवाले (ते) = वे आप (नः) = हमारी (नावम्) = नौका को, इस जीवन-यात्रा की पूर्णता की साधनभूत शरीररूप नाव को (दिवा नक्तम्) = दिन-रात (उरुष्यत) = रक्षित करो। [२] हम (अरिष्यन्तः) = अहिंसित होते हुए (पायुभिः) = रक्षक प्राणों से (निसचेमहि) = नितरां समवेत हों।
भावार्थभाषाः - भावार्थ-प्राण ही सुदानु हैं, सम्यक् वासनारूप शत्रुओं का खण्डन करनेवाले हैं। ये हमारी शरीररूप नाव का रक्षण करें। हम इन रक्षक प्राणों के साथ सदा समवेत हों।
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शिव शंकर शर्मा

पुनस्तमेवार्थं दर्शयति।

पदार्थान्वयभाषाः - हे सुदानवः=शोभनदातारः सेनानायकाः ! ते=यूयम्। नोऽस्माकम्। नावम्। दिवा नक्तम्। उरुष्यत=पालयत। पायुभिः=रक्षकैर्युष्माभिः सह। अरिष्यन्तः=अहिंसिता वयम्। निसचेमहि=नितरां समवेता भवेम ॥११॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - May they all, nobly generous and giving, protect our ships day and night, and may we all, unhurt and unviolated, ally and cooperate with our protectors.